Vasuki Indicus snake

Vasuki Indicus snake : वासुकी इंडिकस: भारत में मिला 47 मिलियन वर्ष पुराना विशाल सांप, जिसकी लंबाई 15 मीटर तक होने का अनुमान

Vasuki Indicus snake : गुजरात के कच्छ क्षेत्र में वैज्ञानिकों को एक विशाल प्राचीन सांप के जीवाश्म मिले, जिसे बाद में Vasuki indicus नाम दिया गया। इन जीवाश्मों के अध्ययन से पता चला कि यह सांप लगभग 47 मिलियन वर्ष पहले, यानी करीब 4.7 करोड़ वर्ष पूर्व, भारत के भू-भाग में रहता था। यह खोज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT Roorkee) के वैज्ञानिकों के शोध से सामने आई। अर्थ साइंसेज विभाग के प्रोफेसर सुनील बाजपेयी और पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता देबाजीत दत्ता ने मिले जीवाश्मों का विस्तृत अध्ययन किया। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्राप्त कशेरुकाओं के आधार पर इस प्राचीन सांप की लंबाई लगभग 11 से 15 मीटर तक होने का अनुमान लगाया गया है। इतनी बड़ी संभावित लंबाई के कारण इसे अब तक ज्ञात सबसे विशाल प्राचीन सांपों में शामिल किया जाता है। Vasuki indicus के जीवाश्म कच्छ के पनंध्रो लिग्नाइट माइन क्षेत्र से मिले। यहां से सांप की रीढ़ की कई जीवाश्मीकृत कशेरुकाएँ प्राप्त हुईं। इन अवशेषों की बनावट, आकार और संरचना का आधुनिक तथा विलुप्त सांपों से तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने इसकी पहचान एक नई प्रजाति के रूप में की। इस खोज की खास बात केवल इस सांप का विशाल आकार नहीं है। यह जीवाश्म वैज्ञानिकों को उस समय के भारत के पर्यावरण, जलवायु, जैव-विविधता और सांपों के विकासक्रम को समझने का अवसर भी देता है। जिस समय Vasuki indicus धरती पर मौजूद था, उस समय आज का कच्छ क्षेत्र वर्तमान स्वरूप से काफी अलग था और वहां की जलवायु तथा पारिस्थितिकी भी अलग परिस्थितियों में विकसित हो रही थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अपने विशाल शरीर के कारण Vasuki indicus संभवतः तेज गति से पीछा करने वाला शिकारी नहीं था। इसकी शारीरिक बनावट को देखते हुए यह संभव है कि यह धीरे-धीरे चलता और उपयुक्त अवसर मिलने पर अपने शिकार पर घात लगाकर हमला करता रहा हो। हालांकि इसके व्यवहार और भोजन के संबंध में उपलब्ध प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इन बातों को वैज्ञानिक अनुमान के रूप में ही समझना चाहिए। इस प्राचीन सांप का नाम भी अपने आप में विशेष है। Vasuki indicus में “Vasuki” नाम भारतीय पौराणिक परंपरा में प्रसिद्ध नाग वासुकी से लिया गया है, जबकि “indicus” भारत से इसके संबंध को दर्शाता है। इस प्रकार वैज्ञानिक नाम इस जीव के भारतीय संदर्भ को भी सामने लाता है। Vasuki indicus की खोज भारत के प्रागैतिहासिक इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके जीवाश्म केवल एक विशाल सांप की कहानी नहीं बताते, बल्कि वे हमें उस समय की दुनिया के बारे में सोचने के लिए मजबूर करते हैं जब पृथ्वी का पर्यावरण, महाद्वीपों की स्थिति और जीव-जगत आज से बिल्कुल अलग था। आखिर 47 मिलियन वर्ष पहले भारत की धरती कैसी थी? यह विशाल सांप किस वातावरण में रहता था? इसका शरीर इतना बड़ा क्यों विकसित हुआ? और क्या यह वास्तव में दुनिया के सबसे बड़े सांपों में से एक था?

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इन सवालों के जवाब Vasuki indicus के जीवाश्मों और वैज्ञानिक अध्ययन में छिपे हैं। आइए, जानते हैं भारत में मिले इस अद्भुत प्रागैतिहासिक सांप की पूरी कहानी।

Vasuki indicus क्या था?

  • Vasuki indicus सांपों के विलुप्त Madtsoiidae समूह से संबंधित था। यह आधुनिक सांपों की तरह आज जीवित नहीं है, बल्कि इसका अस्तित्व करोड़ों वर्ष पहले था।
  • इसका वैज्ञानिक नाम Vasuki indicus रखा गया। शोधकर्ताओं के अनुसार इसके नाम का पहला विवरण  Vasuki हिंदू पौराणिक परंपरा में भगवान शिव से जुड़े प्रसिद्ध नाग वासुकी से प्रेरित है, जबकि indicus भारत से इसके संबंध को दर्शाता है।

नागराज वासुकी की कहानी

पुराणों के अनुसार वासुकी नागों के राजा माने जाते हैं। उन्हें भगवान शिव का परम भक्त बताया गया है। इसी कारण भगवान शिव के गले में दिखाई देने वाला नाग प्रायः वासुकी के रूप में वर्णित किया जाता है। उनकी सबसे प्रसिद्ध भूमिका समुद्र मंथन में आती है। जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए क्षीरसागर का मंथन करने का निर्णय लिया, तो मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया। देवता और असुर वासुकी को पकड़कर समुद्र मंथन करने लगे। मंथन के दौरान वासुकी के शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ा और उनके मुख से विष निकलने लगा। इसी समुद्र मंथन से भयंकर हलाहल विष निकला, जिसे संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया। इसी घटना से शिव का नाम नीलकंठ प्रसिद्ध हुआ।

 वासुकी और भगवान शिव का संबंध

वासुकी को भगवान शिव का भक्त और उनके गणों से संबंधित नाग माना जाता है। शिव के गले में नाग का होना केवल आभूषण नहीं, बल्कि भय पर विजय, मृत्यु पर नियंत्रण और प्रकृति की शक्तियों पर प्रभुत्व का प्रतीक भी माना जाता है।

 वासुकी से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण बात

पुराणों में वासुकी का संबंध नागलोक और नागवंश से भी बताया गया है। उनकी बहन मनसा देवी के साथ भी उनका संबंध कुछ पुराणिक परंपराओं और लोककथाओं में मिलता है।

Vasuki indicus के जीवाश्म कहां मिले?

  • इस विशाल सांप के जीवाश्म गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित Panandhro Lignite Mine से मिले।
  • वैज्ञानिकों को यहां सांप की रीढ़ के हिस्से से संबंधित जीवाश्म कशेरुकाएँ मिलीं। शोध में संरक्षित 27 कशेरुकाओं का अध्ययन किया गया और इन्हीं के आधार पर सांप के शरीर की लंबाई का अनुमान लगाया गया।
  • यह खोज भारतीय उपमहाद्वीप के प्रागैतिहासिक जैव-विविधता के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कितना लंबा था यह प्राचीन सांप?

  • Vasuki indicus की सबसे रोमांचक विशेषता इसका विशाल आकार था।
  • वैज्ञानिकों ने इसके जीवाश्म कशेरुकाओं की संरचना और आधुनिक तथा विलुप्त सांपों के उपलब्ध आंकड़ों की तुलना करके इसकी कुल लंबाई का अनुमान लगाया।
  • अध्ययन के अनुसार इसकी अनुमानित लंबाई लगभग:

Vasuki indicus 11 से 15 मीटर

  •  इसका शरीर लगभग 36 से 50 फीट तक लंबा हो सकता था।
  • इसी वजह से मीडिया में इसे अक्सर 50-foot ancient snake या लगभग 50 फीट लंबे प्राचीन सांप के रूप में बताया गया।
  • हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि 50 फीट इसका प्रत्यक्ष रूप से मापा गया शरीर नहीं है। यह जीवाश्म कशेरुकाओं से वैज्ञानिक गणना द्वारा निकाला गया अनुमान है।

क्या Vasuki indicus, Titanoboa से भी बड़ा था?

Titanoboa को लंबे समय से दुनिया के सबसे विशाल ज्ञात प्राचीन सांपों में गिना जाता है। Vasuki indicus की कुछ लंबाई गणनाएँ Titanoboa के अनुमानित आकार से अधिक निकलती हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने स्वयं इस तुलना में सावधानी बरतने की बात कही है, क्योंकि अलग-अलग जीवों की लंबाई का अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग डेटासेट और गणितीय मॉडल इस्तेमाल किए जाते हैं। इसलिए यह कहना अधिक उचित है कि Vasuki indicus दुनिया के सबसे बड़े ज्ञात सांपों में से एक था, न कि निश्चित रूप से सबसे लंबा सांप।

Vasuki indicus snak  सांप कब रहता था?

  • Vasuki indicus लगभग 47 मिलियन वर्ष पहले, यानी मध्य इयोसीन (Middle Eocene) काल में रहता था।
  • उस समय पृथ्वी का वातावरण आज की तुलना में काफी अलग था। शोध के अनुसार उस समय इस क्षेत्र का औसत तापमान लगभग 28°C रहा होगा।
  • उस समय वर्तमान कच्छ का परिदृश्य आज के शुष्क और रेगिस्तानी क्षेत्र जैसा नहीं था। शोधकर्ताओं ने इसके रहने के लिए गर्म और वनस्पति तथा दलदली परिस्थितियों वाले पर्यावरण की संभावना व्यक्त की है।

क्या Vasuki indicus इंसानों के समय में था?

  • Vasuki indicus और आधुनिक मानव सभ्यता के बीच करोड़ों वर्षों का अंतर है।
  • यह सांप लगभग 47 मिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में था। इसलिए इसका संबंध मानव इतिहास, प्राचीन सभ्यताओं या डायनासोर के साथ सीधे जोड़ना सही नहीं होगा।
  • यह एक महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक जीव था, जो पृथ्वी के उस दौर में रहता था जब आज के कई महाद्वीप और पारिस्थितिक तंत्र वर्तमान स्वरूप में विकसित नहीं हुए थे।

Vasuki indicus क्या खाता होगा?

वैज्ञानिकों ने इसकी शारीरिक संरचना के आधार पर अनुमान लगाया है कि यह संभवतः धीमी गति से चलने वाला शिकारी था। इसके विशाल शरीर और कशेरुकाओं की बनावट को देखते हुए शोधकर्ताओं ने संभावना व्यक्त की कि यह आधुनिक बड़े अजगरों या एनाकोंडा की तरह अपने शिकार को शरीर से लपेटकर दबाने, यानी constriction, की रणनीति अपनाता रहा होगा। हालांकि इसके वास्तविक आहार के बारे में प्रत्यक्ष प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे किसी विशेष जानवर का निश्चित शिकारी बताना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।

क्या यह बहुत तेज दौड़ता था?

  • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि Vasuki indicus अपने विशाल शरीर के कारण बहुत तेज गति से शिकार करने वाला सांप नहीं रहा होगा।
  • इसके शरीर की बनावट से यह संभावना सामने आती है कि यह धीमी गति से चलने वाला घात लगाकर शिकार करने वाला शिकारी रहा होगा।
  • यानी यह संभवतः अपने आसपास आने वाले शिकार का इंतजार करता और सही अवसर मिलने पर हमला करता था।

भारत के लिए यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

  • Vasuki indicus की खोज केवल एक विशाल सांप की खोज नहीं है।
  • यह भारत के प्रागैतिहासिक पर्यावरण, जीव-जगत और महाद्वीपीय विकास को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।
  • इस जीव के अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि करोड़ों वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप में किस तरह के जीव रहते थे और उनका संबंध दुनिया के दूसरे हिस्सों के प्राचीन जीवों से कैसे था।

भारत से अफ्रीका तक कैसे पहुंचा होगा इसका वंश?

  • शोधकर्ताओं ने Vasuki indicus और संबंधित प्राचीन सांपों के बीच संबंधों का अध्ययन किया है।
  • अध्ययन के अनुसार Vasuki का संबंध भारत के एक पुराने Madtsoia और उत्तर अफ्रीका के Gigantophis जैसे प्राचीन सांपों से है।
  • वैज्ञानिकों ने यह संभावना व्यक्त की है कि भारत और एशिया के बीच भूगर्भीय संपर्क बनने के बाद इस सांप के वंश से जुड़े जीव दक्षिणी यूरेशिया के रास्ते उत्तर अफ्रीका तक फैल सके होंगे।
  • यह खोज उस समय के महाद्वीपीय बदलाव और जीवों के प्रसार को समझने में भी महत्वपूर्ण है।

Vasuki नाम क्यों रखा गया?

  • इस प्राचीन सांप का नाम भारत की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा है।
  • शोधकर्ताओं ने इसका वैज्ञानिक नाम Vasuki indicus रखा। शोधपत्र में बताया गया है कि Vāsuki नाम हिंदू पौराणिक परंपरा में प्रसिद्ध नाग से लिया गया है और indicus इसके भारतीय मूल को दर्शाता है।
  • इस तरह इस वैज्ञानिक नाम में प्राचीन जीवाश्म और भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ—दोनों का मेल दिखाई देता है।

इस खोज के पीछे कौन से वैज्ञानिक थे?

  • इस खोज और अध्ययन से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक Debajit Datta और Sunil Bajpai हैं, जो Indian Institute of Technology Roorkee (IIT Roorkee) से जुड़े हैं।
  • उनका शोध अप्रैल 2024 में Scientific Reports में प्रकाशित हुआ। शोधपत्र का शीर्षक था:
  • “Largest known madtsoiid snake from warm Eocene period of India suggests intercontinental Gondwana dispersal.”

क्या Vasuki indicus आज भी जीवित हो सकता है?

नहीं।

Vasuki indicus एक विलुप्त प्रजाति है। इसके जीवाश्म हमें करोड़ों वर्ष पुराने भारत के पर्यावरण और जीव-जगत की जानकारी देते हैं। आज दुनिया में इतने विशाल आकार का Vasuki indicus जीवित नहीं है।

एक विशाल सांप ने हमें क्या बताया?

  • Vasuki indicus की कहानी केवल एक विशाल सांप की कहानी नहीं है।
  • यह हमें बताती है कि आज का भारत करोड़ों वर्ष पहले बिल्कुल अलग भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों से गुजर रहा था।
  • जहां आज गुजरात का कच्छ क्षेत्र काफी शुष्क दिखाई देता है, वहीं लगभग 47 मिलियन वर्ष पहले यहां गर्म जलवायु और ऐसे पारिस्थितिक वातावरण मौजूद थे जिनमें विशाल सांप जैसे जीव रह सकते थे।
  • इस जीवाश्म ने वैज्ञानिकों को भारत के प्राचीन पर्यावरण, सांपों के विकास और प्राचीन महाद्वीपों के बीच जीवों के फैलाव की कहानी समझने के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग दिया है।

निष्कर्ष

Vasuki indicus भारत में मिला एक असाधारण प्रागैतिहासिक सांप था, जिसकी अनुमानित लंबाई लगभग 11 से 15 मीटर तक हो सकती थी। लगभग 4.7 करोड़ वर्ष पहले कच्छ क्षेत्र में रहने वाला यह विशाल सांप आज विलुप्त हो चुका है, लेकिन इसके जीवाश्म वैज्ञानिकों को उस समय के भारत और पृथ्वी के प्राचीन जीवन की कहानी समझने में मदद कर रहे हैं। यह खोज भारत की धरती के उस अद्भुत इतिहास की याद दिलाती है, जब आज के परिचित भू-दृश्यों की जगह एक गर्म और बिल्कुल अलग दुनिया मौजूद थी—और उसमें Vasuki indicus जैसा विशाल सांप घूमता था।

आलेख : डॉ आनंद किशोर दांगी

 

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