Uncategorized

डिजिटल संवाद की दुनिया: सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स का समग्र परिचय | The World of Digital Communication: Introduction to Social Media and Communication Platforms

Social Media : आज का युग संवाद का है — विचारों का, भावनाओं का, व्यापार का और संस्कृति का यूग है जन्हा Social Media के बिना कोइए कार्य संभव नही है । Social Media के विभिन पारकर है – इंटरनेट ने जिस तरह से दुनिया को जोड़ा है, उसमें सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स की […]

डिजिटल संवाद की दुनिया: सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स का समग्र परिचय | The World of Digital Communication: Introduction to Social Media and Communication Platforms Read More »

गौतम बुध के पूर्व जन्मो की प्रेरक जातक कथा | बुद्धि ही महान लोक कथा

झारखंड की सांस्कृतिक धरती पर रची गई यह प्रेरक कथा केवल जंगल की राजनीति नहीं, बल्कि जीवन की गूढ़ सच्चाइयों को उजागर करती है। “बुद्धि ही महान” एक ऐसी कहानी है जो शक्ति, स्वार्थ, निष्ठा और विवेक के बीच के संघर्ष को दर्शाती है — ठीक वैसे ही जैसे जातक कथाओं में गौतम बुद्ध के

गौतम बुध के पूर्व जन्मो की प्रेरक जातक कथा | बुद्धि ही महान लोक कथा Read More »

संथाली लोक कथा | सोहराय पर्व की उत्पत्ति: कपिला गौओं का स्वागत और मानव का उत्सव

संताल संस्कृति की जड़ें उस समय की हैं जब पृथ्वी केवल जल से ढकी थी और जीवन की कोई स्पष्ट रेखा नहीं बनी थी। उसी अनादि काल में ‘ठाकुर जिउ’ — सृष्टिकर्ता — ने दो मानव शिशुओं को जन्म दिया, जो ‘हांस-हांसिल’ पक्षियों के घोंसले में उत्पन्न हुए थे। यह कथा केवल एक पौराणिक आख्यान

संथाली लोक कथा | सोहराय पर्व की उत्पत्ति: कपिला गौओं का स्वागत और मानव का उत्सव Read More »

khuti district

झारखण्ड राज्य के खूंटी जिला की सम्पूर्ण जानकारी | Khunti district of Jharkhand state

झारखंड राज्य के दक्षिणी भाग में स्थित खूंटी जिला,(Khunti district)  न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आदिवासी चेतना का भी जीवंत प्रतीक है। यह जिला 12 सितम्बर 2007 को राँची से अलग होकर एक स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई बना, लेकिन इसकी पहचान सदियों पुरानी है — जहाँ प्रकृति, परंपरा और प्रतिरोध

झारखण्ड राज्य के खूंटी जिला की सम्पूर्ण जानकारी | Khunti district of Jharkhand state Read More »

Ranchi district | राँची जिला का इतिहास: झारखंड की सांस्कृतिक और राजनीतिक विरासत |

झारखंड की धरती, विशेषतः राँची जिला, केवल एक प्रशासनिक केंद्र नहीं , बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और संघर्ष की जीवंत गाथा है। यहाँ की पहाड़ियों, नदियों और जंगलों ने न केवल प्रकृति को सँजोया है, बल्कि अनेक क्रांतियों, आंदोलनों और सांस्कृतिक पुनर्जागरणों को भी जन्म दिया है। राँची की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि उस विरासत की कहानी

Ranchi district | राँची जिला का इतिहास: झारखंड की सांस्कृतिक और राजनीतिक विरासत | Read More »

संथाली लोक कथा – बारे इतातू: भाई का धनुष, बहन की रक्षा” |संताल समाज की परंपरा पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी

भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत में लोककथाएँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज की परंपराओं, मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों का जीवंत दस्तावेज भी हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक लोककथा संताल समाज से जुड़ी है, जो एक भाई की वीरता, एक बहन की सुरक्षा और एक पिता की मजबूरी को उजागर करती है।

संथाली लोक कथा – बारे इतातू: भाई का धनुष, बहन की रक्षा” |संताल समाज की परंपरा पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी Read More »

कुरमाली लोककथा कर्म और धर्म | करम देवता की प्रेरक कथा

 कुरमाली लोककथा कर्म और धर्म : “कर्म और धर्म नामक दो भाइयों की कहानी है, जो प्राचीन भारत में साथ रहते थे। समय ने उन्हें अलग कर दिया—धर्म ने अपने प्रयास और सिद्धांतों को बनाए रखा, जबकि कर्म भाग्य के भरोसे हो गया। कर्म की पत्नी ने एकादशी व्रत तोड़ा और तभी उनके जीवन में

कुरमाली लोककथा कर्म और धर्म | करम देवता की प्रेरक कथा Read More »

खोरठा लोककथा, सोहराई पर्व, फुचु और फुदनी | khortha lok katha sohraie ke prtap

खोरठा लोककथा: सोहराएक परताप : लोककथाएं किसी भी समाज की सांस्कृतिक स्मृति होती हैं। यह कथाएं न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों को भी पीढ़ी दर पीढ़ी संप्रेषित करती हैं। खोरठा लोककथाओं की यह परंपरा भी अत्यंत समृद्ध है। प्रस्तुत कथा “सोहराएक परताप” एक ऐसी मार्मिक प्रेमकथा है जो प्रेम, लोकविश्वास और जीवन

खोरठा लोककथा, सोहराई पर्व, फुचु और फुदनी | khortha lok katha sohraie ke prtap Read More »

ankhik-geet-आँखिक-गीत-खोरठा-कविता-खो

जोदी खोजा मान-श्री निवास पानुरी |आँखिक गीत खोरठा कविता संकलन | झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या

खोरठा कविता “जोदी खोजा मान” गहरे भावबोध और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत है। यह कविता व्यक्ति के आत्मबोध, साधना, प्रकृति की सुंदरता और मातृभाषा के गौरव को एक साथ पिरोती है।जोदी खोजा मान करे होतो निज के दान तबे ऎते खोरठें जान.यह कविता श्रीनिवास पानुरी द्वारा लिखा गया है . कविता संकलन आंखीक गीत” (ANKHIK

जोदी खोजा मान-श्री निवास पानुरी |आँखिक गीत खोरठा कविता संकलन | झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या Read More »

ankhik-geet-आँखिक-गीत-खोरठा-कविता-खो

khortha kavita nach bandar nach re | नाँच बाँदर नाँच रे-श्री निवास पानुरी | झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या

नाँच बाँदर नाँच रे : यह कविता एक प्रकार का संवाद और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ “बाँदर” (बंदर) को नचाने की बात हो रही है। लेकिन यह सिर्फ बंदर के नाचने की बात नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की स्वार्थपरता, अपेक्षा और लेन-देन के संबंधों की भी प्रतीकात्मक झलक देती है। यह कविता न सिर्फ

khortha kavita nach bandar nach re | नाँच बाँदर नाँच रे-श्री निवास पानुरी | झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या Read More »