शिमला मिर्च की खेती| Shimla mirch (capsicum) ki kheti

शिमला मिर्च की उन्नत एवं वैज्ञानिक तरीके से खेती

शिमला मिर्च की खेती किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। इसे ग्रीन पेपर स्टीलवेल पेपर आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है शिमला मिर्च की लगभग जितने भी किस्म है,तीखापन बहुत ही काम या नही के बराबर है। इसमें मुख्य रूप से विटामिन A विटामिन c की मात्रा अधिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता हैं। इन्हीं कारणों के कारण रसोई घर में शिमला मिर्च की मांग ज्यादा है; और लोग इसे अधिक खाना पसंद करते हैं। जो किसान भाई इस फसल को उगाने के बारे में सोच रहे हैं उनके लिए यह लेख काफी लाभप्रद होगा । 

shimla mirch
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जलवायु

सामान्यता इस फसल को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है लेकिन यह नंबर आद्रता जलवायु की फसल है। इसके लिए 20 सेंटीग्रेड से 25 सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त माना जाता है। इस मौसम में अच्छी फसल का उत्पादन किया जा सकती है। ठंड के मौसम में इसके फूल कम लगते हैं फल छोटे बड़े एवं टेढ़ी-मेढ़ी आकार के हो जाते हैं जो उपयुक्त मौसम नहीं माना जाता है। 

शिमला मिर्च का बीज एवं पौधारोपण का समय

बीज बोने का समय    पौधरोपण का समय
जून-जुलाई

अगस्त सितंबर

नवंबर दिसंबर

जुलाई-अगस्त

सितंबर- अक्टूबर

दिसंबर- फरवरी

शिमला मिर्च उगाने के लिए उपयुक्त भूमि की आवश्यकता

मिट्टी- चिकनी दोमट शिमला मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। मृदा का पीएच मान 6से 6.5 उपयुक्त माना जाता है।वही बलुई दोमट मृदा में भी अधिक खाद डालकर एवं सही समय एवं उचित सिंचाई प्रबंधन कर खेती किया जा सकता है।

शिमला मिर्च की उन्नत किस्में

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शिमला मिर्च की जो उन्नत किस्म है जिसे लगाकर किसान अच्छी आमदनी और अच्छी पैदावार कर सकते हैं उसकी उसकी सूची इस प्रकार है

अर्का गौरवअर्का मोहनीकिंग ऑफ नॉर्थ कैलिफोर्निया वंडर अर्का बसंत ऐश्वर्या,अलंकार,अनुपम,हरी रानीपूसा दीप्ति
भारतग्रन्गोल्डहीरा                       इंदिरा

शिमला मिर्च के लिए उपयुक्त उर्वरक

शिमला मिर्च जिस खेत में लगाया जाना है खेत के हिसाब से गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद डालना चाहिए खाद के रूप में रोपाई के समय लगभग 60 केजी नत्रजन 60 से 80 केजी सल्फर एवं 40 से 60 किग्रा किलोग्राम पोटाश डालना चाहिए एवं 7 किग्रा नत्रजन को दो भागों में बांट कर खड़ी फसल में रोपाई में छिड़काव किया जाना अनिवार्य होता है

शिमला मिर्च के लिए नर्सरी तैयार करना

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शिमला मिर्च के दाने से पौधा तैयार करने के लिए खेत के एक छोटे से भाग पर क्यारी बनानी चाहिए इस तरह चार से पांच क्यारियां एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए पर्याप्त रहती है प्रत्येक क्यारी मे दो से तीन टोकरी गोबर की अच्छी सड़ी खाद देना होता है। मृदा को उपचारित करने के लिए 1 किग्रा बविस्टिन को प्रति लीटर पानी के घोल में छिड़काव करना चाहिए। लगभग 1 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पर्याप्त माना जाता है अर्थात एक हेक्टर खेत में शिमला मिर्च लगाने के लिए 1kg शिमला मिर्च का दाना का प्रयोग किया जाना होता है ।बीजों को बोने के पूर्व थाइरम, कैप्टन या बविस्टिन को ढाई ग्राम किलो बीज के हिसाब से उपचारित कर के कतारों में प्रत्येक 10 सेंटीमीटर की दूरी में लकड़ी या कुदाली की सहायता से 1 सेंटीमीटर गहरी नाली बनाकर दो 3 सेंटीमीटर की दूरी से बुआई करना चाहिए ।बीजों को बोने के बाद गोबर की खाद व मिट्टी के मिश्रण से अच्छी तरह धड़क देना चाहिए ।उसके बाद हल्की सिंचाई करना आवश्यक होता है यदि संभव हो तो क्यारी को पुआल या सूखी घास फूस से कुछ दिनों के लिए ढक देना चाहिए ताकि बीज का अंकुरण सही से हो और सभी दाने अंकुरित होकर पौधा बन सके अक्सर गांव घरों में किसानों के द्वारा इस विधि को अपनाया जाता है।

शिमला मिर्च के पौधे का रोपण विधि

जब क्यारी में पौधा 10 से 15 सेंटीमीटर लंबा तैयार हो जाए तब यह पौधा खेत में रोकने योग्य माना जाता है क्यारी में शिमला मिर्च के बीज से पौधा तैयार होने में लगभग 45 से 50 दिन लग जाते हैं अब खेत में पौधारोपण करने के पूर्व जहां नर्सरी बनाए हैं जंहा क्यारी बना shimla हुआ है  पौधा निकालने के पूर्व क्यारी को अच्छी तरह सिंचाई कर देना चाहिए । ताकि पौधा क्यारी से निकालने के दौरान जड़ टूटे नहीं और आसानी से पौधा निकल सके। पौधे को निकाल लेने के बाद उसकी जड़ को बविस्टिन के1 ग्राम लीटर पानी के घोल में आधा घंटा डूबा कर रखना चाहिए उसके बाद खेतों में रोपाई किया जाना चाहिए खेतों में रोपाई करने के बाद शिमला मिर्च के पौधे को हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है ताकि उसकी जड़ मिट्टी में पकड़ सके और पौधा मरे नहीं।

खेत में लगे शिमला मिर्च की सिंचाई

शिमला मिर्च के पौधे को सिंचाई करने के दौरान बहुत कुछ सावधानियां बरतनी पड़ती है इसके पौधे को कम या ज्यादा पानी दोनों में नुकसान होता है यदि खेत में ज्यादा पानी का भराव हो गया हो तो तुरंत जल निकाल दिया जाना चाहिए मृदा में नमी कम होने पर सिंचाई जल्द कर देना चाहिए नेमी की पहचान करने के लिए खेतों की मिट्टी को हाथ में लेकर लड्डू बना कर देखना चाहिए यदि मिट्टी का लड्डू आसानी से बने तो मृदा में नमी है यदि ना बने तो सिंचाई की आवश्यकता है इन सभी बातों पर किसान भाइयों को ध्यान रखना अनिवार्य होता है गर्मियों में 1 सप्ताह एवं शीत ऋतु में व10 से 15 दिनों के अंतराल पर पौधे की सिंचाई की जानी चाहिए उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर सिंचाई करने से अच्छी फसल का उत्पादन होता है।

निराई एवं गुड़ाई (पौधे के जड़ों केआस पास खुदाई)

अच्छी फसल उत्पादन की दृष्टि से पौधे रपण के 30 से 45 दिनों तक खेतों को खरपतवार मुक्त रखना अनिवार्य होता है। पौधारोपण के बेताल 25 एवं 45 दिनों के बाद दो बार निराई गुड़ाई अर्थात खुदाई करना चाहिए। पौधरोपण के 30 दिन बाद पौधे में मिट्टी चढ़ाना चाहिए ताकि पौधे मजबूत हो जाए एवं पौधे गिरे नहीं यदि खरपतवार नियंत्रण के लिए रसायनों का प्रयोग करना हो तो खेत में नमी की अवस्था में पिंडी मैथिली 4 लीटर या इलेक्ट्रोल 2 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में सिंचाई किया जाना चाहिए।

शिमला मिर्च के फल- फूल गिरने से बचाव

शिमला मिर्च में फूल लगना प्रारंभ हो जाए तो वैसी स्थिति में प्लानोफिक्स नामक दवा को 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के घोल में पहला छिड़काव करना होता है एवं इसके 25 दिन 30 दिन बाद दूसरी छिड़काव करना अनिवार्य होता है। इससे फूल का झड़ना कम हो जाता है एवं फल अच्छे लगते हैं ।

शिमला मिर्च में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों एवं उससे पौधे की सुरक्षा

शिमला मिर्च में लगने वाले प्रमुख कीट का नाम इस प्रकार है :- मांहो, थ्रिप्स, सफेद मक्खी एवं मकड़ी इत्यादि कीड़े मकोड़े।

इन कीटों से सुरक्षा:- इन कीटों से सुरक्षा के लिए लाइव मैच हुए या मिथाइल डेमेटन या मेलाथियान का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल पर दो-तीन बार छिड़काव पौधे के ऊपर किया जाना चाहिए। हेलो की चौड़ाई के पश्चात इन रसायनों का छिड़काव किट एवं रोगों से सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए।

शिमला मिर्च में लगने वाले प्रमुख रोग:

आद्रता गलन रोग – छोटे-छोटे पौधे जब क्यारी में तैयार हो रहे होते हैं उस समय यह रोग लगता है इस रोग के कारण जमीन की सतह वाले तने का भाग काला पडकर गिर जाता है और यह नन्हे छोटे पौधे मरने लगते हैं। इस रोग से रोकथाम के लिए बुवाई के पूर्व ही बीजों को थीरम के टोन बविष्टिन 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर बोना चाहिए तथा नर्सरी जहां तैयार की जा रही है उस क्यारी को भूमि से 6 से 8 इंची ऊंची होनी चाहिए

भभूति रोग :- यह लोग ज्यादातर गर्मियों में होता है इस रोग के कारण पत्तियां सफेद चुन्नी युक्त धब्बे बनने लगते हैं यह रोग की अधिकता होने पर पत्तियां पीली पढ़कर सूखने लगती है एवं पौधा पौधा हो जाता है इस बीमारी से पौधे को बचाने के लिए सल्फैक्स या केले से इलेक्शन का 0.2% का घोल 15 दिन के अंतराल पर दो तीन बार छिड़कना चाहिए

जीवाणु उखटा रोग:- शिमला मिर्च की पौधों में यह रोग काफी खतरनाक होता है यह रोग पकड़ लेने के बाद खेत की फसल हरि की हरि मुरझा कर सूख जाती है और यह रोग पौधे में किसी भी समय लग सकता है इस रोग से रोकथाम के लिए ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई कर के खेत को कुछ समय के लिए खाली छोड़ देना चाहिए तथा आप फसल चक्र को अपनाना चाहिए। रोपाई के पूर्व खेतों में ब्लीचिंग पाउडर 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि मिलाई जानी चाहिए।

पर्ण कुचन रोग:- यह रोग शिमला मिर्च के पौधे में लग जाने के बाद पौधे के पत्ते सिकुड़ कर मुड़ जाते हैं। तथा छोटे एवं भूरे रंग युक्त हो जाते हैं

इस रोग से रोकथाम करने के लिए बुवाई से पूर्व कार वॉश यूराल 8 से 10 ग्राम प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भूमि में मिलाना होता है तथा पौधरोपण के 15 से 20 दिन के बाद डायमीट हाय एक एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव कर रोग से सुरक्षा पाया जा सकता हौ

शिमला मिर्च की फसल की तुड़ाई

शिमला मिर्च की फसल तैयार होने के बाद किसानों को हल्का इंतजार रहता है इतनी प्रक्रिया गुजरने के बाद पौधारोपण के 65 से 70 दिन के बाद प्रारंभ हो जाता है जोकि 90 से 120 दिन तक चलता है। किसान भाइयों को नियमित रूप से शिमला मिर्च की फसल का तोड़ाई का कार्य करना चाहिए।

मुनाफा या आमदनी

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उन्नतशील किस्मों में 100 से 120 क्विंटल एवं संकर किस्मों में 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर शिमला मिर्च का उत्पादन होता है।यदि ऊपर बताएंगे तकनीक एवं वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर शिमला मिर्च का उत्पादन कर अच्छी आमदनी की जा सकती है। एक अनुमान के अनुसार 1 एकड़ भूमि में बताएंगे वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर 3:00 से 3:30 लाख रुपया तक आमदनी की जा सकती है। हालांकि बाजार में शिमला मिर्च का दाम कम वैसी होते रहता है परंतु ₹50 से लेकर ₹120 प्रति किलो तक बिकता ही है। बड़े शहरों में शिमला मिर्च की मांग ज्यादा होती है और दाम भी अच्छा मिलता है। यदि किसान भाई इस तरह वैज्ञानिक एवं तकनीकी का प्रयोग कर अच्छे फसलों का उत्पादन कर सकते हैं और एक मोटी रकम चलाना कमा सकते हैं।

                                                                                                                                 

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