SELF HELP GROUP (SHG) स्वयं सहायता समूह शहर या गांव के आसपास के कम से कम 10 से अधिक या 20 से कम महिलाओं द्वारा जुड़ी हुई समूह को स्वयं सहायता समूह कहते हैं।स्वयं सहायता समूह गरीबी से बाहर निकले का एक संस्था है ।
गरीबी – गरीबी का अभिप्रय ,वैसे लोगों से है जिनके पास अच्छा खाने के लिए खाना नहीं है पढ़ने के लिए अच्छे कपड़े नहीं है रहने के लिए अच्छा मकान नहीं है पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए पैसे का भाव है, वैसे लोगों को गरीब का सकते हैं ।
गरीबी हटाने के सात कदम
- सुरक्षा कवच बीमा
- सामाजिक समस्याओं पर लड़ने की क्षमता बढ़ाना
- पूंजी बढ़ाने का उपाय करना
- सही आजीविका का चयन करना
- क्षमता संवर्धन का विकास करना
- गरीबों को संगठित करना
- गरीबी का पहचान करना
स्वयं सहायता समूह SELF HELP GROUP (SHG) आवश्यक है
- गरीब महिलाओं के बीच में एकता लाने के लिए आवश्यक है
- गरीब महिलाएं अपनी समस्याओं पर चर्चा करने हेतुु समूह आवश्यक है
- अपनी क्षमता और बुद्धि बुद्धि के लिए
- सीमा और आसपास के संसाधनों की पहचान कर अपनी क्षमता विकास के लिए
- अपनी नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के
- सामाजिक आर्थिक विषयों के ऊपर जागरूक होने के लिए
- सरकारी योजनाओं और कानून द्वारा प्राप्त हक को प्राप्त करने के लिए
- महिलाओं को सुरक्षा कवच के रूप
- महिलाओं में समानता प्राप्त करने के लिए
- अपना जिओ का उपार्जन हेतु
- उचित आजीविका का चयन करने हेतु
- गरीबों को संगठित कर क्षमता संवर्धन हेतु।
स्वयं सहायता समूह (SHG)का गठन
- एक मोहल्ले में रहने वाले 10 से 20 गरीब महिलाओं का एक समूह बनाना चाहिए
- समूह के बारे में प्रशिक्षण देना चाहिए
- सभी की सहमति से समूह का एक नाम रखना चाहिए
- 3 तीन पदाधिकारियों का चुनाव करना चाहिए
- समूह के नाम पर नजदीकी की बैंक शाखा में खाता खोलना चाहिए
- समूह को चलाने के लिए कुछ नियम और कुछ कानून होना चाहिए
- समूह में शामिल होने वाली महिलाएं गरीब होनी चाहिए समूह की सदस्यता उम्र 18 से 50 वर्ष के लिए बीच होनी चाहिए
- एक परिवार से एक ही महिला होनी चाहिए
- सदस्य होने वाली महिला किसी अन्य समूह से जुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए
- सदस्यता पाने वाली महिला किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़ाव नहीं होना चाहिए
- सभी सदस्यों की सहमति से समूह का एक नाम रखना चाहिए
- सभी सदस्य मिलकर दो या तीन पदाधिकारियों का चुनाव करना चाहिए
- समूह के नाम पर बैंक में खाता खुलवाना चाहिए
- सभी सदस्य मिलकर चर्चा करके बैठक चलाने के लिए एक निश्चित दिन और समय तय करना
- सभी सदस्य हर बैठक में उपस्थित होना अनिवार्य है
- बैठक में सभी सदस्य को गोलाकार में बैठना चाहिए
- सभी सदस्य मिलकर चर्चा करके सप्ताहिक बैठक में करने वाला बचत तय करना
- हर बैठक में उसी बैठक की अध्यक्ष को चुनाव करना चाहिए
- एजेंडा तैयार करके एजेंटों के अनुसार चर्चा करने का सही निर्णय लेना चाहिए
- समूह की बैठक में ही सारे लेनदेन करवाना
- सदस्यों की जरूरतों का पहचान करके ऋण देकर किस्त और ब्याज तय करना
- समूह के पुस्तक लिखने के लिए प्रशिक्षण के लिए हुए पुस्तक संचालक को रखना और समूह के आए से मान दे देना चाहिए
- 2 साल में एक बार पदाधिकारियों का बदलाव करना अनिवार्य है
- समूह को लेनदेन साल में एक बार ऑडिट करवाना चाहिए
- सरकारी योजना और सामाजिक समस्याओं पर चर्चा करने के लिए बैठक आवश्यक है
- बैठक में पुस्तक लिखना अनिवार्य है और पुस्तक पढ़कर सुनाकर सभी सदस्यों से हस्ताक्षर पर आने वाली है
- समूह के नियम का पालन न करने वाले सदस्य को दंड वसूल करना चाहिए
- समूह के पुस्तक को पदाधिकारियों के पास रखना अनिवार्य है
- हर महीने के अंत में पुस्तक संचालक से मासिक प्रतिवेदन तैयार करवाना अनिवार्य है
SELF HELP GROUP (SHG) समूह के लक्षण
- सप्ताहिक बैठक करना और सारे सदस्यों का उपस्थिति अनिवार्य है ।
- 10 सूत्र का पालन करते रहना ।
- हर सप्ताह सदस्यों के आंगन में बैठक करते रहना ।
- एजेंडा के अनुसार बैठक चलाते रहना ।
- बचत किस्त और ब्याज सही तरीके से भुगतान करते रहना।
- सदस्यों के जरूरतों को पहचान करके ऋण की ब्यवस्था ।
- हर महीने बैंक में लेनदेन जरूर करते रहना है।
- प्रशिक्षित बुक कीपर के द्वारा पुस्तक का संचालन एवं रख रखाव तथा समूह की आय से मानदेय देते रहना है।
- प्रत्येक वर्ष समूह पुस्तक का ऑडिट करवाना अनिवार्य है।
- हर साल में एक बार समूह के पदाधिकारियों का बदलाव करते रहना है।
- व्यक्तिगत सामाजिक और सरकारी योजनाओं पर चर्चा करते रहना है।
- समूह की सदस्यों की संपत्ति के ऊपर बीमा करवाना है।
- अशिक्षित सदस्यों को हस्ताक्षर सिखाना है।
- समूह के पुस्तक ऑफिस बेरियर केे पास रखते रहना है।
- प्रत्येक महीना मासिक प्रतिवेदन बनाना ।
- सभी सदस्यों का उपस्थिति होना अनिवार्य है।
समूह की बैठक के तरीका
- सभी सदस्यों को गोलाकार बैठना है ।
- सभी सदस्य अपना नाम समूह का नाम एवं अपना पद बताते हुए अपना पूरा परिचय देना चाहिए ।
- सभी सदस्यों की उपस्थिति पुस्तक संचालक को लेनी चाहिए।
- बैठक के अध्यक्ष के चुनाव करना चाहिए ।
- एजेंडा तैयार करके एजेंडा के अनुसार बैठक चलाना चाहिए।
- पिछली बैठक की कार्यवाही सभी को पढ़कर सुनाना चाहिए।
- बचत किस्त ब्याज और ऋण जमा करके रहना है ।
- सदस्यों की जरूरतों के ऊपर चर्चा करके ऋण मंजूरी करना अनिवार्य है ।
- बैंक लेनदेन सभी सदस्यों को बताना चाहिए।
- सामाजिक समस्या सरकारी योजना और ग्राम संगठन के बारे में चर्चा करना।
- बैंक में प्राप्त और भुगतान को पढ़कर सुनाना चाहिए ।
- बैठक की कार्यवाही को सभी सदस्यों को पढ़कर पढ़कर सुनाना और हस्ताक्षर कराना अनिवार्य है।
सप्ताहिक बैठक से स्वयं सहायता समूह के सदस्यों का लाभ
- बचत करने के लिए आसानी होती है ,कम ब्याज दर पर
- उधार मिलता है।
- सदस्यों के बीच में एकता विश्वास और प्यार बढ़ती है।
- समूह का लेनदेन और सदस्यों का ऋण विवरण सभी को जानकारी मिलती है।
- नेतृत्व लक्षण सभी सदस्यों में बढ़ती है।
- पुस्तक संचालन सही तरीके से होती है।
- समूह के सदस्यों के आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सहायक होता है ।
- समूह के सदस्यों के आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सहयोग सप्ताहिक बैठक करने से ज्यादा विषयों पर चर्चा करने में सुविधा होती है।
समूह का पंच सूत्र
- नियमित सप्ताहिक बैठक
- नियमित सप्ताहिक बचत
- नियमित ऋण का संचालन
- समय से ऋण तथा ब्याज वापसी
- नियमित सप्ताहिक लेखा जोखा।
समूह का 10 सूत्र
नियमित साप्ताहिक बैठक जाकर करना है
सप्ताहिक बैठक करने से बचत करने में आसानी होती है जैसे आमदनी को जीने के लिए भी रखना जरूरी है उसी प्रकार सप्ताहिक बैठक भी जरूरी है
निमित्त सप्ताहिक बचत
सप्ताहिक बचत करने से हमारे छोटे-छोटे दोस्तों कालीन लेकर पूरा कर सकते हैं
हर बैठक में आंतरिक उधार जरूर देना है
आंतरिक लेनदेन करने से एक दूसरे का जरूरत पूरा होता है जैसे चावल के लिए पढ़ाई के लिए इलाज के लिए हर खर्च के लिए अंतरिक्ष लेनदेन इत्यादि
निमित्त किस और प्याज को सही तरीके से वापस करना है
संसार का समूह के सदस्य जो ग्रीन लिए हुए हैं उनको रेन को नियमित किस्त और प्यास से वापस करना चाहिए जिससे हमें जरूरत पड़ने पर आसानी से ऋण ले सकते
प्रशिक्षण पाए हुए पुस्तक संचालक से पुस्तक संचालन कराना है
प्रशिक्षित पुस्तक संचालक के द्वारा पुस्तक का संचालन करने से पुस्तकों का सही तरीके से रखरखाव और
स्वास्थ्य सूत्र
स्वास्थ्य सूत्र से चर्चा करने से साफ सफाई , कई विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव का तरीका का पता चलता है।
शिक्षा सूत्र
शिक्षा से हमारे परिवार समाज का आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
सरकारी योजना सूत्र
सरकार की योजनाओं को सही तरीके से जानकारी देकर बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों को जागरूक करना।
आजीविका बढ़ावा सूत्र
सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में समूह के सदस्यों को जानकारी प्राप्त होती है और उनके आगे का को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।
पुस्तक संचालन से स्वयं सहायता समूह फायदा
- समूह पर सदस्यों का विश्वास बढ़ता है।
- समूह का आर्थिक स्थिति मालूम पड़ता है।
- सदस्यों का व्यक्तिगत समाचार की जानकारी मिलती है।
- समूह का नियम पालन की जानकारी होती है।
- समूह का इतिहास की जानकारी मिलती है।
- समूह की पारदर्शिता बढ़ता है।
- समूह में छोटा एवं बड़ा ऋण विवरण की वश्यकता की जानकारी होती है।
- बाहर संस्थाओं से आर्थिक सहायता मिलती है।
- समूह के पुस्तक ऑडिट करने में और समूह को ग्रेडिंग करने में सहायता मिलती है।
सहायता समूह के पुस्तक के प्रकार
- बैठक प्रस्ताव पुस्तक
- उपस्थिति और बचत पुस्तक
- ऋण पुस्तक
- नगद पुस्तक पुस्तक
- साधारण खाता बही पुस्तक
- सदस्य का व्यक्तिगत पासबुक
- मासिक प्रतिवेदन
चित्र
पुस्तक संचालन
स्वयं स्वयं सहायता समूह के 7 प्रकार के पुस्तकों को लिखने वाले को पुस्तक संचालक कहते हैं। पुस्तक संचालक को समूह की सदस्य चुनाव करती है और समूह के द्वारा पुस्तक संचालक को एक मानदेय दिया जाता है।
पुस्तक संचालक की योग्यताएं
- 18 से 40 साल के बीच का उम्र होना चाहिए उसे स्वयं सहायता समूह से संबंधित होना चाहिए।
- उसी मोहल्ले या गांव की होनी चाहिए ।
- गरीब परिवार से संबंधित होना चाहिए तथा कम से कम सातवीं कक्षा पास होना अनिवार्य है।
- विवाहित महिला होनी चाहिए । ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ होना अनिवार्य है।
- सहनशील और सेवा भाव देने वाली होना चाहिए ।
- समय का पालन करने वाली होनी चाहिए।
- गरीब के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
पुस्तक संचालक का कार्य
- पुस्तक संचालक को समूह की बैठक में 15 मिनट पहले आना चाहिए।
- पिछली बैठक की सारी कार्यवाही को पढ़कर समूह में सुनाना।
- बैठक में ही एजेंडा को तैयार करके एजेंडा के अनुसार सारी कार्यवाही और लेन-देन सभी सदस्यों के सामने रखना चाहिए।
- हर महीना का मासिक प्रतिवेदन तैयार करके पदाधिकारियों को देना चाहिए ।
- समूह में रखे हुए नियमों को हर बैठक में याद करवाना चाहिए।
- सरकारी और प्रोजेक्ट से मिलने वाली योजनाओं को के बारे में तुरंत जानकारी देनी चाहिए।
- पुस्तकों में सदस्यों का हस्ताक्षर लेना अनिवार्य है।
- अंगूठा लगाने वाले सदस्यों को हस्ताक्षर सिखाना अनिवार्य है।
- बैठक के अंत में कार्यवाही को पढ़कर सुनाने सुना के हस्ताक्षर कराना अनिवार्य है।
- प्रशिक्षण और समूह का जरूरतों के अनुसार प्रधान बैठकों में उपस्थित होना।
पुस्तक संचालक के द्वारा नहीं किए जाने वाले कार्य-
- समूह का जमा पैसा नहीं छूना और लेन-देन नहीं करना है।
- समूह के निर्णयों में भाग नहीं लेना है।
- पुस्तक में छेड़छाड़ और पन्ना नहीं पढ़ना है।
- समूह का गुप्त रहने वाले बातों को बाहर में नहीं चर्चा करनी है ।
- बैठक में लिखते लिखते बीच में उठकर नहीं जाना है।
- किसी भी सदस्य के पक्ष में नहीं रहना है।
- समूह पर पुस्तक को अपने साथ नहीं ले जाना है।
- बुरी आदतें नहीं होनी चाहिए।
समूह में अध्यक्ष की जिम्मेदारी
- समूह की बैठक कि कुछ समय पहले आना अनिवार्य है।
- समूह की पुस्तक एवं संपत्ति के ऊपर जिम्मेदारी लेना है।
- समूह की पुस्तक और सदस्यों का व्यक्तिगत पासबुक और बैंक लेनदेन में हस्ताक्षर करना है।
- समूह के सदस्यों के निर्णय के अनुसार अमल करना है ।
- समूह के माध्यम से ए एल एफ में मासिक प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होना है।
- ए एल एफ में होने वाले कार्यक्रम और मुख्य निर्णय के बारे में सभी सदस्यों को जानकारी देना है।
- जरूरत के अनुसार विशेष बैठक एवं प्रशिक्षण में उपस्थित होना अनिवार्य है।
समूह में सचिव की जिम्मेदारी
- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में समूह की बैठक की पूरी जिम्मेदारी लेना है।
- अध्यक्ष के साथ साथ बैठक में लेन-देन में हस्ताक्षर करना है। एलएफके बैठक में उपस्थित होना अनिवार्य है।
- समूह की पुस्तक सही ढंग से रखना है।
समूह में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारियां
- समूह की बैठक में कुछ समय पहले आना अनिवार्य है।
- जरूरत के अनुसार एलएफके बैठक में उपस्थित होना है।
- समूह के माध्यम से बैंक लेनदेन में शामिल होना है
- समूह के पुस्तकों का ऑडिट करते समय ऑडिटर की मदद करना है।