संसदीय राज्यभाषा समिति की 11वी रिपोर्ट:शिक्षण संस्थानों में स्थानिय भाषा
संसदीय राजभाषा समिति भारतीय भाषाओं के उत्थान के लिए 1976 ईस्वी में गठित की गई थी 30 सदस्य जिसमें 20 लोकसभा से और 10 राज्य सभा से होते हैं. समिति प्रत्येक 5 वर्षों में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करती है. हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा और कामकाज को बढ़ावा देने के उदेश से एस समिति का गठन किया गया है .केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली संसदीय राजभाषा समिति ने अपने 11 वी अनुशंसा की है. अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू को सौंप दी है इस रिपोर्ट में निम्नलिखित मुख्य बातें इस प्रकार है-
- केंद्रीय केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित सभी तकनीकी एवं गैर तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का माध्यम अनिवार्य रूप से हिंदी और स्थानीय भाषा में की जानी चाहिए
- हिंदी को संयुक्त राष्ट्र के अधिकारिक भाषा बनाए जाने के लिए कोशिश करने का सुझाव दिया गया है
- आजादी के 75 वर्ष के बाद भी न्यायालय कार्यालयों बैंकों और शैक्षणिक संस्थानों में अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व है इसे भारतीय भाषाओं का विस्तार को काफी प्रभावित होता है राष्ट्रीय विकास भी बाधित होता है इसे देश की बड़ी आबादी उपेक्षित और वंचित रह जाती है अतः स्थानीय भाषा एवं हिंदी को अनिवार्य रूप से इन संस्थानों में लागू करना चाहिए
- जीन प्रतियोगिता परीक्षाओं में अंग्रेजी भाषा का एक प्रश्न पत्र अनिवार्य रहता है समिति ने इस व्यवस्था को हटाने का सुझाव दिया है
- न्यायालयों में मुख्य रूप से अंग्रेजी में कामकाज होता है और निर्णय भी अंग्रेजी में ही दिए जाते हैं उन्हें हिंदी अनुवाद की अनुशंसा की है