Rules for flying the Indian national flag | भारतीय रास्ट्रीय ध्वज फहराने या लगाने के नियम :-

भारतीय रास्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) फहराने या लगाने  के नियम :-

(Rules for flying the Indian national flag)

 

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आम जनता गैर सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं आदि के द्वारा भारतीय रास्ट्रीय ध्वज(तिरंगा)(Indian national flag) का प्रदर्शन प्रयोग एवं फहराने के संबंध में :-

Rules for flying the Indian national flag

  • आम जनता गैर सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं आदि के द्वारा राष्ट्रीय झंडे के प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा शिवाय अपमान निवारण अधिनियम 1971 तथा इस विषय पर बनाए गए नियम के अनुसार पालन किया गया हो।
  • झंडे का प्रयोग व्यवसायिक प्रयोजन के लिए नहीं किया जाए किसी व्यक्ति या वस्तु को सलामी देने के लिए झंडे को झुकाया नहीं जाए झंडे को आधा झुकाकर नहीं फहराया जाए, शिवाय उन अवसरों को जब सरकारी भवनों पर झंडे को आधा झुकाकर फहराने का आदेश जारी न किया गया हो ।
  •  कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान पर या किसी ऐसे स्थान पर जो सार्वजनिक रूप से दृष्टिगोचर हो ,वहां भारतीय राष्ट्रीय झंडे या भारत के संविधान या उसके किसी भाग को जलाता है, नष्ट करता है दूषित करता है उछलता है या मौखिक या लिखित रूप में अपमान करता है तो उसे 3 वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
  • झंडे को किसी भी रूप में लपेटने जिसमें व्यक्तिगत शव यात्रा शामिल है के  काम में नहीं लाया जाएगा।
  • किसी प्रकार की पोशाक या वर्दी के भाग में झंडे का प्रयोग नहीं किया जाएगा और ना किसी रुमाल ,नैपकिन ओ अथवा किसी ड्रेस सामग्री के रूप में इसका प्रयोग किया जाएगा ।
  • झंडे पर किसी प्रकार के अक्षर नहीं लिखे जाएंगे ।
  • झंडे को किसी वस्तु को प्राप्त करने ,देने या पकड़ने अथवा ले जाने के पात्र के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा। लेकिन विशेष अवसरों और राष्ट्रीय दिवसों पर जैसे गणतंत्र दिवस स्वतंत्रत दिवस गांधी जयंती इत्यादि समारोह के रूप में झंडे को फहराने से पूर्व उसमें फूलों की पंखुड़ियां रखने में कोई आपत्ति नहीं होगी ।
  • किसी किसी प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर झंडे को सम्मान के साथ और पृथक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा और इसका प्रयोग प्रतिमा अथवा स्मारक को ढकने के लिए नहीं किया जाएगा ।
  • झंडे का प्रयोग ना तो वक्ता की इमेज को ढकने और नहीं वक्ता के मंच को सजाने के लिए प्रयोग किया जाएग ।
  • झंडे को जानबूझकर जमीन अथवा फर्ज को छूने अथवा पानी में घास इतने नहीं दिया जाएगा।
  • झंडे को वाहन रेलगाड़ी नाम अथवा वायुयान की छत ऊपर बगल अथवा पीछे से ढकने में काम नहीं लाया जाएगा ।
  • झंडे का प्रयोग किसी भवन में पर्दा लगाने के लिए भी नहीं किया जाएगा ।
  • झंडे को लगाने फहराने के समय केसरिया रंग को नीचे प्रदर्शित नहीं किया जाएगा ।
  • फटा हुआ मैला  कुचेला झंडा प्रदर्शित या फहराया  नहीं जाएगा ।
  • झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाए ।
  • यदि झंडे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाना चाहिए कि जब वक्ता का मुंह श्रोता की और हो तो झंडा उनके दाहिने और रहे अथवा झंडे को वक्ता के पीछे दीवार के साथ और उसके ऊपर लेटी हुई स्थिति में प्रदर्शित किया जाए ।
  • जनता द्वारा कागज के बने झंडे को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर हाथ में लेकर ही लाया जा सकता है ।परंतु ऐसे कागज के झंडे को समारोह समाप्त होने के पश्चात न तो वितरित किया जाएगा और ना ही जमीन पर फेंका जाएगा जहां तक संभव हो ऐसे झंडू का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप एकांत में किया जाना चाहिए ।
  • झंडे का प्रदर्शन खुले में क्या जाता है तो वहां मौसम का ध्यान रखे बिना उसे सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाना चाहिए ।
  • झंडे को सलामी देने के बाद राष्ट्रगान होगा और इस कार्यक्रम के दौरान परेड सावधान की अवस्था में रहेगी।

भारतीय झंडा संहिता 2002 तथा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 में निहित नियमों के अनुसार राष्ट्रीय झंडे को फहराया एवं लगाया जाता है । 

 

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