नगर उंटारी का श्री बंशीधर मंदिर|Nagarutari ka sri bansidhar mandir

नगर उंटारी का श्री बंशीधर मंदिर(Nagarutari ka sri bansidhar mandir) झारखंड राज्य के गढ़वा जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में स्थित है। नगर उंटारी बिहार उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के त्रिकोण आत्मक सीमा पर अवस्थित है ।बाँकी  नदी पर स्थित इस नगर से 16 किलोमीटर दूर  कनहर नदी के पार मध्य […]

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Tamasin jalprapat chatra | तमासिन जल प्रपात चतरा

तमासिन जल प्रपात चतरा (Tamasin jalprapat chatra) तमासिन जल प्रपात प्राकृतिक सौंदर्य, मनोहारी दृश्य के लिए काफी प्रसिद्ध है। झारखंड राज्य के चतरा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर  कोल्हिया प्रखंड  के  तुलबुल पंचायत, तमासिन नामक स्थान  पर  स्थित है। फल्गु नदी के सहायक नदी महाने नदी पर तमासिन नामक जलप्रपात स्थित है। तमासिन  स्थल

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खोरठा कवियों की रचनाएँ | Khortha kaviyon ki pramukh rchna

खोरठा कवियों की प्रमुख रचनाएँ | Khortha kaviyon ki pramukh rchna खोरठा भाषा साहित्य में भी अन्य भाषाओं की तरह शिष्ट साहित्य का विकास पद्य साहित्य से ही प्रारम्भ हुआ है। सामान्यतः 16 वीं -17 वीं शताब्दी में पद्य – साहित्य की रचना प्रारम्भ हो गई और 1960 दशक के बाद पद्य – साहित्य के

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स्वयं सहायता समूह SELF HELP GROUP (SHG)

SELF HELP GROUP (SHG) स्वयं सहायता समूह शहर या गांव के आसपास के कम से कम 10 से अधिक या 20 से कम  महिलाओं द्वारा जुड़ी हुई समूह को  स्वयं सहायता समूह कहते हैं।स्वयं सहायता समूह गरीबी से बाहर निकले का एक संस्था है । गरीबी – गरीबी का अभिप्रय ,वैसे लोगों से है जिनके

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Area leval federation क्षेत्र स्तर संघ ALF

एरिया लेवल फेडरेशन Area leval federation (ALF) संगठन का अर्थ है – ” शहर में अवस्थित स्वयं सहायता समूह (SHG) आस – पास के वार्ड में कम से कम 10 और अधिक से अधिक 20 समूहों का  वैसा संघ जो जुड़े हुए विभिन्न समूहों के बीच एक कड़ी का कार्य करता है तथा उन समूहों

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khorta vyakarn or rachan

खोरठा भाषा की लिपि | खोरठा भासाक लिपि | Khortha bhasha ki lipi

खोरठा भाषा की लिपि | खोरठा भासाक लिपि | Khortha bhasha ki lipi खोरठा भासाक बर्तनी लेखन यदि खोरठा भाषा के ध्वनि को आप समझ जायेंगे तो खोरठा भाषा लिखना और पढ़ना बहुत ही आसान हो जायेगा। खोरठा भाषा की लिपि (Khortha bhasha ki lipi) नहीं होने के कारण इसे हम देवनागरी लिपि में प्रयोग

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खोरठा गद्य साहित्य का विकास | Khortha gady sahitya ke vikas

खोरठा गद्य साहित्य का विकास 20 वीं शताब्दी के पांचवें दशक से माना जाता है। इसका अर्थ हुआ कि नवयुग के कवि भुवनेश्वर दत शर्मा ‘ व्याकुल ‘ के खोरठा में लिखने के शुरूआती दौर में गद्य साहित्य का प्रारम्भ हुआ। इस संबंध में खोरठा भाष एवं साहित्य ( उद्भव एवं विकास ) में ‘

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Tatapani | तातापानी गर्मजल श्रोत

झारखंड राज्य के लातेहार जिला घने जंगलों पहाड़ों और नदियों से घिरा हुआ है। यहां पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, नेतरहाट, बेतला नेशनल पार्क, पलामू किला जैसे पर्यटक स्थल देश में अपनी पहचान रखते हैं। इसके अलावा बहुत सारी प्राकृतिक मनोरम दृश्य उत्पन्न करने वाले पर्यटक स्थल है जो  लोगों तक पहुंच से बाहर है।

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Khortha bhasa ka udbhav | खोरठा भाषा का उद्भव और विकास

झारखंडी भाषा साहित्य एवं संस्कृति पर ग्रंथ – लेखन एवं शोध – प्रकाशन की अनवरत प्रक्रियाएँ चल रही है उससे सुखद अनुभूति स्वाभाविक है। खास कर खोरठा भाषा (Khortha bhasa) साहित्य पर जो काम हो रहे हैं उससे लगता है कि खोरठा भाषा की व्यापकता और उपादेयता में वृद्धि हो रही है। यह कारण है

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BANASO MANDIR JHARKHAND | महामाया वगेश्वरी मन्दिर झारखण्ड

BANASO MANDIR JHARKHAND बेरमो बोकारो गांधीनगर थाना क्षेत्र के जारंगडीह, स्थित बनासो मंदिर जो महामाया बागेश्वरी देवी को समर्पित है। यह मंदिर प्राचीन एवं पौराणिक है। झारखंड राज्य का एक आस्था का केंद्र बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि यहां आने वाले सभी भक्तजनों का मनोकामना पूर्ण होती है। सच्चे मन से मांगी

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