खोरठा साहित्यकार राम किसुन सोनार |Khortha litterateur Ram Kisun Sonar

राम किशुन सोनार (Ram Kisun Sonar)झारखण्ड के जाने माने खोरठा साहित्यकार , लोकप्रिय नाटक कलाकार, हारमोनियम वादक और गायक है। प्रारम्भ से अध्यन अध्यापन से जुड़े रहे है। शिक्षक पद से सेवानिवृत होने के बाद खोरठा भाषा के विकास के लिए लग गए है। उन्होंने कहा ” मैं ने अपने जीवन में अनुभव किया है […]

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Bhadrkali mandir itkhori chatra jharkhand | भद्रकाली मंदिर इटखोरी चतरा झारखण्ड में क्या खाश है

झारखण्ड के पर्यटक स्थलों में  में  विश्व विख्यात (Bhadrkali mandir itkhori chatra jharkhand  )  भद्रकाली इटखोरी  महत्व पूर्ण स्थान  है। यह झारखण्ड राज्य के चतरा जिला अंतर्गत इटखोरी प्रखंड मुख्यालय में स्थित  है। यंहा 12 सदी का माँ भद्रकाली की प्राचीन मंदिर  है ।  मंदिर में एक ही विशाल शिलाखण्ड को तराश कर  कलात्मक ढंग

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jssc book | jssc khortha blast | jssc खोरठा ब्लास्ट |khoratha bhaasha samagr adhyayan |खोरठा भाषा समग्र अध्ययन

खोरठा भाषा समग्र अध्ययन – jssc खोरठा ब्लास्ट  सीरिज की तीन  पुस्तक पाठ्यक्रम पर आधारित   टॉपिक वाइज विश्लेषण,वस्तुनिस्ट(ऑब्जेक्टिव ) एवं 30 प्रेक्टीस  सेटों का संग्रह – डॉ . आनन्द किशोर दांगी एवं नागेन्द्र यादव  झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित सभी स्नातक योग्यताधारी संयूक्त प्रतियोगिता परीक्षा यथा सचिवालय,नगरपालिका,औद्योकिक प्रशिक्षण स्नातक स्तरीय सहायक आचार्य इत्यादि परीक्षाओं

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khortha vachy | खोरठा वाच्य

  खोरठा वाच्य (khortha vachy )- वाच्य क्रिया के वेसन बदलल रूप के कहल जा हे, जेकर से उस बात के पछान बा पता चाले कि वाक्य में कर्ता, कर्म बा भाव में  केकर प्रधानता हइ । खोरठा वाच्य (khortha vachy ) की परिभाषा- क्रिया के वेसन बदलाव के कहल जा हे ,जेकर से कर्ता

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Folk song | लोकगीत |लोकगीत परिभाषा महत्त्व वर्गीकरण

लोकगीत  (Folk song) लोक सहित्य का अभिन अंग है, जो गेय रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी मोखिक रूप में चलते आ रही है। जिन्हें कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा लोक समाज गाता है और अपनाता है। सामान्यतः लोक में प्रचलित, लोक द्वारा रचित एवं लोक के लिए लिखे गए गीतों को लोकगीत कहा जा

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खोरठा लोक कथा बूढी और नाती |बुढ़ी आर ओकर नाती | BUDHI OR NATI

एगो गाँवे एगो बुढी रह- हली । ओकर बेटा – पुतोहु तो नाइ रहथिन खाली एगो सोना लखें नाती रहइ । नातीक उमइर एहे . छोउ – सात बछर हतइ । ऊ बुढ़ी रोइज बोन से पतइ – दोइतन , झुरी – काठी आर बोन से कंद – मुल आनतली आर ओकरे से गुजर –

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लोक कथा सात भाई और बहन

khortha lok katha saat bhai or bahan | खोरठा लोक कथा सात भाइ एक बहिन

खोरठा भाषा क्षेत्र में अनेक खोरठा लोक कथा है,जो यंहा की भाषा संस्कृति की पहचान है। जिस कारण झारखण्ड में आयोजित प्रतोयोगिता में शामिल किया गया है। यंहा सात भाई और बहन (saat bhai or bahan)की लोक कथा खोरठा भासा में दिया गया है। इस कहानी में भाई और बहन का प्यार ,भाभियो के द्वारा

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लोक कथा सात भाई और बहन

लोक कथा सात भाई और बहन |folk tal seven brothers and sisters | lok katha sat baiy or bahan

“सात भाई और बहन”folk tal seven brothers and sisters:– नामक यह लोक कथा झारखंडी जनजीवन की मिट्टी से उपजी एक मार्मिक कथा है, जो भाई-बहन के रिश्ते की संवेदनशीलता, त्याग और आत्मीयता को उजागर करती है। इस कथा में एक बहन की सरलता और सात भाइयों की भावनात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से यह बताया गया

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झारखण्ड के हो जनजाति | Ho tribe in jharkhand

झारखण्ड की हो ( HO ) जनजाति पश्चिमी तथा पूर्वी सिंहभूम जिले में रहती है । इस क्षेत्र का उत्तरी और दक्षिणी पूर्वी भाग कृषि योग्य और जंगलों से भरा है । पश्चिमी और दक्षिणी पश्चिमी इलाका पहाड़ी और जंगली है । इस क्षेत्र अंतर्गत विश्व का प्रसिद्ध सारंडा  जंगल स्थित है । झारखण्ड में 

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The Oraon trible | झारखण्ड की उराँव जनजाति

उराँव ( ORAON )  जनजाति झारखण्ड, बिहार , पश्चिम बंगाल , उड़ीसा , छत्तीसगढ़ , आसाम तथा अंडमान निकोबार राज्य में भी पायी जाती है । झारखण्ड में इसका मुख्य निवास स्थान गुमला तथा लातेहार जिला है ।  उराँव ( ORAON ) जनजाति के सम्बद्ध में भाषा वैज्ञानिक के द्वारा अपने पुस्तक में बताया है 

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