खोरठा लोककथा भूत मुनिस | Khortha lok katha bhut Munis

खोरठा लोककथा भूत मुनिस ( Khortha lok katha bhut Munis ) में मानव और भूत के बीच बुद्धि और समझदारी की तुलना की गई है। दो भूत आपस में बहस करते हैं कि इस धरती पर सबसे अधिक बुद्धिमान कौन है—मानव या भूत। एक भूत का मानना है कि मनुष्य से अधिक बुद्धिमान कोई नहीं, जबकि दूसरा भूत यह दावा करता है कि भूत ही सबसे चतुर होते हैं। बहस का नतीजा जानने के लिए वे एक किसान को चुनते हैं और उसके साथ काम करने लगते हैं। किसान को भूत की ताक़त और तेज़ी से काम करने की क्षमता देखकर पहले तो बहुत लाभ होता है, लेकिन धीरे-धीरे उसे यह डर सताने लगता है कि कहीं भूत उसकी जान ही न मांग बैठे। तब किसान अपनी चतुराई और सूझबूझ से भूत को ऐसा काम दे देता है, जिसमें वह उलझकर थक जाता है और समझ जाता है कि मानव की बुद्धि के सामने भूत भी हार मानता है।

एक बेर दूगो भूत आपन में बहस कर-हला जे मानुस बेसी बुझ्धगर ना भूत। एगोक मत हलइ मानुस ले बेसी ई धरतीं ककरो बुझ्ध नाइ, दोसरकाक मतें भूत ले बीस केवे नाँइ। दुइयो आपन-आपन जिगिड़ें खूँटा गाड़ल हला। एहे जोखाइँ ऊ डहरें एगो चासा पार हवऽ हल। ऊ जा हल मूनिस खोजे। ओकराँ देइख के पहिल भूतवाइँ दोसरकाक कहलइ, भाइ ई होरो दोदो छोड़ आर आहा देख एगो किसान जा हइ। एकरा हइ एगो बेस दमगर मुनिसेक दरकार। तोइ एकर संग चइल जउ मुनिस बइन कें। खुदे बुझे मे आइ जीतउ जे बुइधें भूत बेसी ने मानुस ।

दोसरका भूतवा ई बात टा माइन लेलइ आर एगो हाठा-काठा मुनिस बइन के चासाक संग सोझाइ देलइ। ऊ चासा टाक खेत-बारी ढेइरे हलइ। मुदा तालेबर रहलो बादें हलइ चाँइ आर चरपट। आपन सभे खेती गिरहस्ति एके गो मुनिसें संझुवे खोज-हल। ओकरो में जेमें बेसी कुरइ नाँइ लागे। एकदमें नॉइ लागे तो आरो बेस। सइले ओकरे अड़बी (शर्त) …

किसान मनें-मनें खुस भेल जे बेसे पइलों। हामर हियाँ कामेक कोन अभाब। भूतवा किसान घरें कामें लाइग गेल। अघन महिनाक दिन ! धान काटाक तड़तड़ी! मुनिसेक अभाबें किसानेक सब धान तामान हलइ खेते लागल। किसानेक आर्हान पाइके भूत मुनिस दुइये दिने सब खेतेक धान काइट के डिंगाइ देलइ। जेटा बीस दिन्हूँ नाइ हतलइ। मइड़े कहलइ तो सब धान एके दिनें मइस-माइस के साइथ। आठे दिनें गोछा बांधा, तील, सूरगुंजा, कुरथी, फेरा-मइसा सब साइथ कइर के बइस गेल भूत।

किसान हाइचक ! हाइ बाप ई की लागइ, घंटाक काम मिनिटें। भारी फिकिर भइ गेलइ ओकर, अबरी काम की देबइ। ढेइर सोंइच बुइझ के एगो काम पइलइ । सोंचल इटाइँ तो कइ दिन जरूरे टानतइ। किसानेक हलइ एगो घुट- टांइड़ हेंठ उपर, पाथर कुचकुचिया। मुनिसवाक सइ टॉइड़ के खेत बनवे अहाइ देलइ। भूत मुनिस खतिर इटोक भारी ! एके दिने घुटु टाँइड़ साबाड़ बनाइ देलइ। बाड़का डाबर, किसानेक देइख के चकरी घूम। भूतवाइँ कहलइ, मालिक काइल की करब, काम देखवा।

किसान अइगला दिन बोन से काठ झुरी काइट आने कहलइ। भूतवाइँ एके बेरांइ काठ-झुरीं डिंगाइ देलइ। किसानें घोरना घोरे कहलइ तो एकड़ पाँचेक डागर-चाकर बारीं एके बेराइँ घोरना घोइर के साइथ ।

एहे तरी, किसान जे बा काम अर्हवइ, भूत तुरते साइथ कइर देइ आर किसान से अइगला काम खोजइ, नाँइ तो एक सूप पीठेक चाम मांगे लागइ। किसानें जते जोहड़ल आर बिदरल काम रहइ सभे भूतवा से कराइ लेलइ। अबे ओकर ठीन कामेक अभाब हवे लागलइ। भाभे लागल की साइव ई भूत मुनिसवाइँ हमर पीठेक एक सूप चाम लइकें हमरों मोराये देतक। मुदा भूतवा जतना खापतान हलइ ततने चरपट किसनवो हलइ। राइतें भाइभ-सॉइच के देखलइ ना-ना एतना कामी खटनिहार आर गुनगर मुनिस के छोड़ेक नाइँ चाही। जेमें साँपो मरे

आर डांगो नाँइ टुटे। आर राइतें किसान ओइसने उपाय खोइज लेलइ। बिहान जखन भूतवें काम मांगलइ तो गरू गाय खोला, सानी-पानी दिया हेन-तेन रोजतुरिया काम गिला ओहाइ देलइ। उगिला साइत कइर के फइर काम मांगलइ तो किसनवें भूतवे से बारी हेंठ ले एगो मोटा बाँस काटाइ अनउलइ। तबे बँसवा आपन अंगनाइ गाड़ा करवलइ। गाड़ल बाद भूतवा से कहलइ, ई खूँटवा में चढ़ आर नांभ। भूत चढ़े आर नांभें लागलइ। किसानेक जखन कोन्हों काम जोहइड़ जाइ भूतवा के करेले कहइ नाँइ तो ओहे खूँटवें चढ़े आर नामें ले ओर्हाइ देइ।

खूँटा चढ़ा नांभाक कोन्हों अँत नाँइ। दुइए दिने भूतेक जाँघ छालाइ गेलइ। अबे भूतेक धरलइ चकरी घुम। कोन्हों बुइध नाँइ सुझे लागलइ। ऊ बुइझ गेल जे मानुसेक बुइधेक आगुइँ केउ ठठे नाँइ पारे। अइल के एक दिन खासीं भूतवा आपन बाथान बोन पराइ गेल। संगी भूतवा से भेंटाइल आर कहल, भाइ तोंइ जीतलें हामें हारलों। माइन गेलों जे भूत ले मानुस बीस ।

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