KHORTHA

झारखंडी भाषा साहित्य एवं संस्कृति पर ग्रंथ – लेखन एवं शोध – प्रकाशन की अनवरत प्रक्रियाएँ चल रही है उससे सुखद अनुभूति स्वाभाविक है। खास कर खोरठा भाषा (Khortha bhasa) साहित्य पर जो काम हो रहे हैं उससे लगता है कि खोरठा भाषा की व्यापकता और उपादेयता में वृद्धि हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर JPSC, JSSC, JTET, झारखंड पुलिस एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षा इत्यादि को ध्यान में रखकर खोरठा भाषा से पूछे जाने वाले प्रश्नों प्रश्नों को तैयार किया गया है।

Khortha Times Patrika | खोरठा टाइम्स पत्रिका 01

खोरठा टाइम्स पत्रिका – 01 झारखंडी भाषा साहित्य एवं संस्कृति पर ग्रंथ – लेखन एवं शोध – प्रकाशन की अनवरत प्रक्रियाएँ चल रही है इससे सुखद अनुभूति होना स्वाभाविक है। खास कर खोरठा भाषा साहित्य पर जो कार्य हो रहे हैं, उससे लगता है कि खोरठा भाषा की व्यापकता और उपादेयता में वृद्धि हो रही …

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importance of folk literature | लोक साहित्य का विशेषता और महत्व

लोक साहित्य वह मौखिक अभिव्यक्ति है, जो भले ही किसी व्यक्ति ने गढ़ी पर आज जिसे सामान्य लोक समूह अपना मानता है और जिसमें लोक की युग-युगीन वाणी, साधना समाहित रहती है, जिसमें लोक मानस प्रतिविम्बित रहता है। वास्तव में लोक साहित्य लोक जीवन की अभिव्यक्ति है। लोक साहित्य लोक जीवन से घनिष्ठ संबंध रखता …

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खोरठा भाषा का नामकरण | khortha Bhasha ka Namkarn

खोरठा भाषा झारखण्ड प्रान्त के उस भाषा विशेष का बोध कराता है, जो उतरी छोटानागपुर, पलामू ओर संथाल परगना के पन्द्रह जिलों के लोगों की मातृभाषा है। साथ ही झारखण्ड में सदियों से सदान और आदिवासी साथ-साथ रहते आये हैं, उनके बीच सम्पर्क भाषा के रूप में खोरठा भाषा महत्वपूर्ण है। क्योंकि मनुष्य सामाजिक प्राणी …

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khortha  basha ka samash | खोरठा भाषा का समास

khortha  basha ka samash खोरठा भाषा का समास खोरठा भाषा का समास (khortha  basha ka samash ):-  वइसन सबदेक कहज जाहे जे दु बा दु से बेसी सबदेक जोड़नार बा नाता गोता से नावा सबद बा बेस अरथ रखे वाला सबदेक कहल जा हइ। समास के भेदः-समास के खोरठांञ सात भेद पावल जाहइ- 1. ततपुरूस …

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Importance of Khortha Folk Literature: खोरठा लोक साहित्य का महत्व

खोरठा लोक साहित्य का महत्व (Importance of Khortha Folk Literature):  देश, काल, परिस्थितियाँ, वातावरण, रीति-रिवाज एवं विधि-विधानों का स्वरूप वहाँ के लोक साहित्य में ही दिखाई देता है। अतीत की घटनाओं, आदिम मानव की प्राचीनतम रूपरेखाओं एवं उसके यथार्थ रूप को जानने में, जहाँ इतिहास के पृष्ठ भी मूक हो जाते हैं, शिलालेख खुदाई आदि …

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KHORTHA BHASHA KE KARAK | खोरठा  भाषा के कारक

खोरठा  भाषा के कारक (KHORTHA BHASHA KE KARAK) खोरठा भाषा  कारक के  परिभाषा क्या है ? संगिआ आर सरबनामेक वइसन रूप के  कहल जा हे जेकर से बाइक केआरो-आरो सबदेक मांझे नाता गोतर के पता चल-हे। जइसे – इ बाइक देखा – राममारलइ कपरा खुन बहल पुलिस अइला पकड़े ले गेला, उ जेल भागल।इ बाइक से …

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KHORTHA BHASA KE KIRIYA | खोरठा भाषा के क्रिआ

 खोरठा भाषा के क्रिआ (khortha bhasha ke kiriya) खोरठा भाषा के क्रिआ परीभाषा :- खोरठा बाइकें क्रिआक ठांव ठेकान बा, जे कोन्हो सबद से कोन्हो का  हवेक बा करेक पता चल हे उकरा किरिआ कहल जा हे। जइसे – खाइक,पिएक, रहेक, जाइकसदानी भासाव वेवहारे किरिआ के चाइर रकम पावल जा हे – क्रिआ के परीभाषा …

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खोरठा विशेषण | khortha visheshan

बिसेसन संगिआ वा सरवनाम  के विशेषता  बतावे उकरा विसेसन कहल जा है । एक पटतर खोरठा लोक गीत देखल जाय गछे के तो गछली चरका बकरवा हो देवा तबो नाही पुरल डावर खेत | गछे के तो गछली रंगलवा मुरगवा हो गांवा देवी तबो नहीं पुराल डाबर खेत ||   हिञा  ई लोक गीते  – …

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Damodar Korayan Poetry | दामोदर कोरांय खोरठा (खण्ड काव्य)

Damodar Korayan Poetry दामोदर कोरांय (खोरठा खंड काव्य ) की रचना शिवनाथ प्रमाणिक के द्वारा 1986 वर्ष में की गई थी। इस पुस्तक का प्रकाशन खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद भातुआ ,बोकारो के द्वारा की गई। दामोदर  कोरांय पुस्तक में छह खंडों में  काव्य की रचना की गई है पहला खंडकाव्य मेला दूसरा  सरंची कमल  तीसरा …

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Shivnath pramanik | शिवनाथ प्रमाणिक

शिवनाथ प्रमाणिक मानिक (Shivnath pramanik “manik”) खोरठा भाषा साहित्य जगत में ओजपूर्ण भाषण ,दबंग व्यक्तित्व, एवं प्रख्यात साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं। दर्जनों हिंदी ,खोरठा  साहित्य की विभिन्न विद्याओ में रचना कर अमिट छाप छोड़ी है।इनकी रचनाओं में यथार्थवाद मानववाद की झलक परिलक्षित होती है। झारखंड की स्थानीय भाषा खोरठा को भाषा साहित्य …

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