KHORTHA

झारखंडी भाषा साहित्य एवं संस्कृति पर ग्रंथ – लेखन एवं शोध – प्रकाशन की अनवरत प्रक्रियाएँ चल रही है उससे सुखद अनुभूति स्वाभाविक है। खास कर खोरठा भाषा (Khortha bhasa) साहित्य पर जो काम हो रहे हैं उससे लगता है कि खोरठा भाषा की व्यापकता और उपादेयता में वृद्धि हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर JPSC, JSSC, JTET, झारखंड पुलिस एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षा इत्यादि को ध्यान में रखकर खोरठा भाषा से पूछे जाने वाले प्रश्नों प्रश्नों को तैयार किया गया है।

nagpuri lok katha gadri chirinya Chhauvaman | नागपुरी लोक कथा | गडरी चरइ कर छउवामन

एक गुँड़री चरइ एक पोखरा-पिंडे अंडा पारलक। चाइरो अंडा गुढ़रते-गुढ़रते फूइट गेलै, आउर उमन से चाइर किसिम कर जीउ पएदा भेलें। पहिल अंडा ले एकठो बरद निकललक, दोसर ले एक अदमी जनमलक, तीसर ले एक नेवरा पएदा होलक आउर चौथा ले जे निकललक से गुंड़री चरइ कर छब धरलक। चाइरो जीव कहर्ले, “लगे आब आपन-आपन […]

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खोरठा लोककथा भूत मुनिस | Khortha lok katha bhut Munis

खोरठा लोककथा भूत मुनिस ( Khortha lok katha bhut Munis ) में मानव और भूत के बीच बुद्धि और समझदारी की तुलना की गई है। दो भूत आपस में बहस करते हैं कि इस धरती पर सबसे अधिक बुद्धिमान कौन है—मानव या भूत। एक भूत का मानना है कि मनुष्य से अधिक बुद्धिमान कोई नहीं, जबकि

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 शिवनाथ प्रमाणिक खोरठा पद्य साहित्य का आधुनिक युग का प्रवर्तक |

खोरठा भाषा साहित्य की परंपरा लोकगीतों, लोककथाओं और मौखिक परंपराओं से प्रारंभ होकर आधुनिक शिष्ट साहित्य तक विस्तृत है। इस साहित्यिक यात्रा में अनेक कवि और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से भाषा को गौरव प्रदान किया। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में जब खोरठा साहित्य आधुनिक चेतना के साथ उभर रहा था, उस समय शिवनाथ प्रमाणिक

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tiptipwa ke dar

खोरठा लोक कथा | टिपटिपियाक डर | Khortha lok katha tiptipya ke dar

खोरठा लोक कथा – टिपटिपियाक डर  (tiptipya ke dar) : कहानी एगो मजेदार लोककथा हइ, जे खोरठा में लिखल गेल हइ। कहानी बुधवा नामक एगो धोबी के जीवन के चित्रण करल गेल हइ, जे रोज गधिया पर लुग्गा लाद के धोवे जाए हइ। ओकर गधिया ओकर काम में मददगार हइ, लेकिन एक दिन गधिया गायब

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khortha lok katha | खोरठा लोक कथा अँधरा बुझल बाँका खीर

“अँधरा धरा बुझल बाँका खीर” एक मार्मिक लोककथा है जो खोरठा भाषा में रची गई है। यह कहानी दो विशेष पात्रों – एक अंधे व्यक्ति और एक लंगड़े व्यक्ति – की गहरी दोस्ती, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है। दोनों की शारीरिक सीमाएं उन्हें एक-दूसरे के पूरक बना देती हैं, और उनका साथ

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खोरठा लोककथा, सोहराई पर्व, फुचु और फुदनी | khortha lok katha sohraie ke prtap

खोरठा लोककथा: सोहराएक परताप : लोककथाएं किसी भी समाज की सांस्कृतिक स्मृति होती हैं। यह कथाएं न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों को भी पीढ़ी दर पीढ़ी संप्रेषित करती हैं। खोरठा लोककथाओं की यह परंपरा भी अत्यंत समृद्ध है। प्रस्तुत कथा “सोहराएक परताप” एक ऐसी मार्मिक प्रेमकथा है जो प्रेम, लोकविश्वास और जीवन

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जोदी खोजा मान-श्री निवास पानुरी |आँखिक गीत खोरठा कविता संकलन | झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या

खोरठा कविता “जोदी खोजा मान” गहरे भावबोध और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत है। यह कविता व्यक्ति के आत्मबोध, साधना, प्रकृति की सुंदरता और मातृभाषा के गौरव को एक साथ पिरोती है।जोदी खोजा मान करे होतो निज के दान तबे ऎते खोरठें जान.यह कविता श्रीनिवास पानुरी द्वारा लिखा गया है . कविता संकलन आंखीक गीत” (ANKHIK

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khortha kavita nach bandar nach re | नाँच बाँदर नाँच रे-श्री निवास पानुरी | झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या

नाँच बाँदर नाँच रे : यह कविता एक प्रकार का संवाद और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ “बाँदर” (बंदर) को नचाने की बात हो रही है। लेकिन यह सिर्फ बंदर के नाचने की बात नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की स्वार्थपरता, अपेक्षा और लेन-देन के संबंधों की भी प्रतीकात्मक झलक देती है। यह कविता न सिर्फ

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ANKHIK GEET KHORTHA KAVITA | आँखिक गीत खोरठा कविता -खोरठा ! हाय! खोरठा – श्रीनिवास पानुरी – झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या

 खोरठा ! हाय! खोरठा :आँखिक गीत खोरठा कविता संकलन  – श्रीनिवास पानुरी द्वारा लिखा गया है .इनके द्वारा यह कविता 1964 ईस्वी के आस पास लिखा गया है .इस कविता संकलन में कुल 72कविता है जिसमे एक खोरठा ! हाय! खोरठा कविता भी सामिल है . खोरठा ! हाय! खोरठा कविता खोरठा भाषा की उपेक्षा, उसके

ANKHIK GEET KHORTHA KAVITA | आँखिक गीत खोरठा कविता -खोरठा ! हाय! खोरठा – श्रीनिवास पानुरी – झारखण्ड पीजीटी परीक्षा में शामिल कविता का हिंदी में व्याख्या Read More »

Janardan Goswami 'byathit

खोरठा भाषा कवि जनार्दन गोस्वामी ‘व्यथित’| Janardan Goswami ‘byathit

जनार्दन गोस्वामी ‘व्यथित’ झारखंड की पावन माटी, माराफरी गाँव ने 2 जनवरी 1936 को एक ऐसे प्रतिभाशाली सपूत को जन्म दिया, जिन्होंने अपने जीवन-संघर्ष और साहित्य साधना से खोरठा भाषा को एक नई ऊँचाई दी — वे थे महाकवि जनार्दन गोस्वामी ‘व्यथित’। माराफरी, जो बाद में एशिया के सबसे बड़े इस्पात कारखाने बोकारो स्टील प्लांट

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