jain ki kahani Panditji or shopkeeper| जैन धर्म की कहानी पण्डितजी और दुकानदार

जैन धर्म की कहानी- पण्डितजी और दुकानदार (jain ki kahani Panditji or shopkeeper) यह प्रसंग  काशी के  पण्डित फूलचंदजी सिद्धम्तशास्त्री,के द्वारा   फतेपुर (गुजरात) में हुई जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रसंग पर सुनाया था । जो जैन धर्म की कहानी पुस्तक में Panditji or shopkeeper पण्डितजी और दुकानदार शीर्षक के रूप में  संकलित है ।कहानी इस प्रकार है –

एक समय की बात है। काशी में एक पण्डित रहते थे, जैनसिद्धान्त के बड़े ज्ञानी थे। एकबार वे बाजार में पूजा के लिए स्टील के बर्तन खरीदने गये। उस जमाने में स्टील के बर्तनों की कीमत ज्यादा होती थी । एक सेट की कीमत साढ़े 9आना थी ।दोनों में मोलतोल किया गया पण्डितजी ने दुकानदार से कहा- साढ़े 9 आना के बदले 9 आना ले लो।

दुकानदार बोला- “पण्डितजी! आप भगवान की पूजा करने के लिये बर्तन ले जा रहे है, भगवान तो आपको बहुत पैसा देंगे तो फिर मोलतोल कियो कार रहे है भला भगवान के पुजारी दो पैसे का लोभ क्यों करता है?”

पण्डितजी भी कम ज्ञानी नहीं थे, उन्होंने भी दुकानदार को युक्तियुक्त जवाब देने की सोची। वे कुछ बोले, पैसे दिये बिना, बर्तनों को अपनी थैली में डालकर चलने लगे।

दुकानदार घबड़ाते हुए पण्डितजी से बोला- “अरे पण्डितजी ! पैसे तो देते जाओ।”

पण्डितजी बोले- “भाई! ये बर्तन तो मैं भगवान की पूजा करने के लिए ले जा रहे है । तुमनेतो ही अभी कहा कि भगवान बहुत पैसे देंगे, तुम्हारे बर्तन से मैं भगवान की पूजा करूँगा, उससे भगवान तुम्हें भी बहुत पैसे देंगे। फिर मुझसे साढ़े 9॥ आना भी लेने की क्या जरूरत है?” पण्डितजी के इस सरल सहज युक्तियुक्त जवाब सुनकर वह मतमस्तक हो गया। पण्डितजी द्वारा ईश्वरकर्तृत्व का खण्डन इतने सरल व सहज तरीके से सुनकर वह व्यापारी अत्यन्त प्रभावित हुआ और पंडित जी के चरणों में जाकर गिर गया |

पण्डितजी दुकानदार को साढ़े 9॥ आना पैसे दिये और समझाते हुवे बोले – “भाई ! भगवान किसी को कुछ नहीं  देते है। भगवान तो अंतर्यामी है परमात्मा हैं। वे पूजा से प्रसन्न होकर कुछ देते नहीं हैं, और निंदा करनेवाले को कोई सजा भी नहीं देते है । हम भी भगवान से कुछ लेने के लिए उनकी पूजा नहीं करते बल्कि  हम तो पूजा के द्वारा उनके गुणों के प्रति आभार प्रगट करते हैं। उससे हमारे परिणाम की जितनी विशुद्धि होती है , उतना हमें लाभ भी होता है।

स्रोत : जैन धर्म की कहानी पण्डितजी और दुकानदार

प्रसंग:- काशी के पण्डितजी थे पण्डित फूलचंदजी सिद्धम्तशास्त्री, उन्होंने यह प्रसंग फतेपुर (गुजरात) में हुई जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रसंग पर सुनाया था।

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