Electral Bonds | चुनावी बांड्स की परिभाषा :-पंजीकृत भारतीय राजनीतिक दलों को वित्त पोषित करने के उद्देश्य से नागरिकों या संघठनों के द्वारा चुनाव खर्च के लिए दी जाने वाली राशि को चुनाव बांड् कहते हैं । जिस देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक के किसी भी शाखा से चेक या डिजिटल भुगतान के माध्यम से खरीदा जा सकता है और और देश के पंजीकृत राजनीतिक दालों के अधिकृत बैंक खाता में 15 दिनों के अंदर नदीकरण किया जाता था ।15 फरवरी 2024 को 7 वर्षों से लागू चुनावी बांड (Electral Bonds) को माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा संवैधानिक करार दिया गया ।
Electral Bonds | चुनावी बांड्स की विशेषता –
- भारत में पंजीकृत राजनीतिक दल जो लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 (धारा 29 A) तहत पंजीकृत है । या वैसे राजनीतिक दल जिन्हें लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कुल मतों का एक प्रतिशत मत प्राप्त हुआ है ।Electral Bonds | चुनावी बांड् लाभ दिया जाता था ।
- पंजीकृत राजनीतिक दलों को भारतीय नागरिक या संगठन द्वारा देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक के किसी भी शाखा से चुनावी बांड खरीद जमा कर सकते हैं ।
- भारतीय स्टेट बैंक शाखा से नागरिक या संगठन 1000, 10000, 1 लाख, 10 लाख, और 1 करोड़ मूल्य का चेक या डिजिटल भुगतान के माध्यम से खरीद सकते हैं ।
- Electral Bonds | चुनावी बांड् खरीदने की तिथि से 15 दिनों के अंदर पंजीकृत राजनीतिक दलों के अधिकृत बैंक खाते में नगदी कारण कर सकते हैं । यदि 15 दिनों के अंदर नगदी कारण नहीं कराया जाता है तो ना तो दाता को वापस की जाती है और नहीं राजनीतिक पार्टी को इसके लिए बल्कि सीधे प्रधानमंत्री राहत कोष में राशि जमा हो जाती है ।
- Electral Bonds | चुनावी बांड् ब्याज मुक्त होता है और धारक को मांगे जाने पर बैंक द्वारा दिया जाता है । अर्थात नागरिक या संगठन जो इलेक्ट्रिकल बॉन्ड खरीदते हैं तो उसे पर 100% कर में छूट दिया जाता है । जिससे बड़े व्यवसाईयों को या कंपनियों को लाभ पहुंचता है
- चुनावी बांड गोपनीय रखे जाने की व्यवस्था है
- Electral Bonds | चुनावी बांड् 7 वर्षों से लागू था
Electral Bonds | चुनावी बांड् कब से लागू था |When was the electoral bond applicable?
- चुनावी बांड की योजना वर्ष 2017-18 में वित्त विधेयक 2017 के रूप में पेश की गई थी ।
- चुनावी बांड को धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत किया गया । संविधान के अनुसार धन विधेयक सिर्फ लोकसभा में ही पारित किया जा सकता है
- 2 जनवरी 2018 को राजपत्र में चुनावी बांड योजना 2018 के रूप में अधिसूचित किया गया ।
- 7 नवंबर 2022 को Electral Bonds | चुनावी बांड् असवैधानिक योजना वर्ष में बिक्री के दिनों का 70 से बढाकर 85 करने का संशोधन किया गया
- 15 फरवरी 2024 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को असवैधानिक करार दिया |
Electral Bonds | चुनावी बांड् असवैधानिक |Electoral bonds unconstitutional
- 15 फरवरी 2024 को 7 वर्षों से लागू चुनावी बांड को माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा संवैधानिक करार दिया गया ।
- मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीश की पीठ ने तत्काल प्रभाव से रोक दिया है ।
- Electral Bonds | चुनावी बांड् भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1 -a) का उल्लंघन करता है । यह सूचना के अधिनियम के विरुद्ध और आज संवैधानिक है ।
- कंपनी एक्ट में संशोधन से कॉर्पोरेट द्वारा असीमित चंदा दिया जाना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है ।
- सुप्रीम कोर्ट ने बॉन्ड जारी करने वाली बैंक भारतीय स्टेट बैंक पर बिक्री पर तुरंत रोक लगाई है
- सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है तीन हफ्ते के अंदर जिन व्यक्तियों या संगठनों ने बॉन्ड की खरीद की है उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए ।
- उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद विभिन्न कंपनियों द्वारा खरीदे गए 5911.5 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉल बांड रद्द किए जा चुके हैं.
भारत के निम्नलिखित कुछ कंपनियों के द्वारा चुनावी बांड खरीदा गया है ,जिसकी जो इस प्रकार है-
क्रम संख्या | कंपनी का नाम | करोड़ रुपये में |
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 | फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लि. वेदांता लिमिटेड हल्दिया एनर्जी लिमिटेड एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लि. वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन केवेंटर फूडपार्क इन्फ्रा लि. मदनलाल लिमिटेड डीएलएफ ग्रुप यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल उत्कल एल्यूमिना इंटरनेशनल जिंदल स्टील एंड पावर लि. बिड़ला कार्बन इंडिया | 1,368 966 410 400 377 224 220 194 185 170 162 145 123 105 |
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