बोकारो जिला : झारखण्ड का औद्योगिक एवं सांस्कृतिक गौरव बोकारो स्टील लिमिटेड | Bokaro District: Industrial Area of ​​Jharkhand Bokaro Steel Limited

झारखण्ड राज्य का बोकारो जिला अपनी औद्योगिक पहचान, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहरों के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस जिले की स्थापना 1 अप्रैल 1991 को हुई थी, जब धनबाद जिले के चास और चंदनकियारी प्रखंडों तथा गिरिडीह जिले के बेरमो अनुमंडल को मिलाकर एक नया प्रशासनिक रूप दिया गया। इस तरह बोकारो अपेक्षाकृत नया जिला है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक और औद्योगिक पहचान बहुत पुरानी है।बोकारो को झारखण्ड का “स्टील सिटी” कहा जाता है। 1964  में रूस की मदद से यहाँ इस्पात कारखाना स्थापित किया गया। रूस ने आर्थिक और तकनीकी दोनों प्रकार का सहयोग प्रदान किया। इसी सहयोग से बोकारो स्टील लिमिटेड की स्थापना हुई। यह कारखाना एशिया का सबसे बड़ा इस्पात कारखाना है और भारत के औद्योगिक विकास में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।यहाँ स्थित बोकारो स्टील प्लांट एशिया का सबसे बड़ा इस्पात कारखाना है, जिसने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इस कारखाने से निर्मित इस्पात ने भारत की आधारभूत संरचना, रेल, ऊर्जा और निर्माण क्षेत्र को मजबूती प्रदान की। यही कारण है कि बोकारो को औद्योगिक विकास का प्रतीक माना जाता है औद्योगिक पहचान के साथ-साथ बोकारो प्राकृतिक संसाधनों से भी समृद्ध है। दामोदर नदी इस जिले की जीवनरेखा है, जो यहाँ के उद्योगों और कृषि दोनों को सहारा देती है। इसके अलावा कोयला और अन्य खनिज संपदा ने बोकारो को ऊर्जा और उद्योग का केंद्र बनाया। यही वजह है कि इसे झारखण्ड के सबसे औद्योगिक जिलों में गिना जाता है। बोकारो का जनजीवन भी इसे विशिष्ट बनाता है। यहाँ विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का संगम देखने को मिलता है। औद्योगिक विकास के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहाँ आकर बसे, जिससे बोकारो बहुसांस्कृतिक स्वरूप वाला जिला बन गया। यहाँ के त्योहार, मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय परंपरा और आधुनिक औद्योगिक जीवन का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करते हैं।

         पर्यटन की दृष्टि से भी बोकारो महत्वपूर्ण है। यहाँ के प्राकृतिक स्थल, झीलें, पहाड़ियाँ और धार्मिक स्थान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बोकारो थर्मल, गोपीनाथ मंदिर, कल्याणी झील और अन्य स्थल इस जिले की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दर्शाते हैं। इस प्रकार बोकारो जिला केवल इस्पात उत्पादन के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि इसकी पहचान बहुआयामी है। औद्योगिक विकास, प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन स्थल—ये सभी मिलकर बोकारो को झारखण्ड का एक विशिष्ट और गौरवपूर्ण जिला बनाते हैं। इसकी स्थापना 1991 में हुई थी, लेकिन आज यह झारखण्ड की औद्योगिक शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है।

बोकारो जिला का भौगोलिक विस्तार

बोकारो जिले का कुल क्षेत्रफल 2880 वर्ग किलोमीटर है। प्रशासनिक दृष्टि से यह जिला दो अनुमंडलों—चास और बेरमो—में विभाजित है। इसके अंतर्गत कुल 9 प्रखंड आते हैं:

चास

बेरमो

गोमिया

चंदनक्यारी

जरीडीह

कसमार

पेटरवार

चन्द्रपुरा

नावाडीह

 बोकारो जिले के प्रखंडवार पंचायत सूची

जिले में 200 पंचायत और 733 गाँव हैं।

नीचे प्रत्येक प्रखंड के अंतर्गत पंचायतों के नाम दिए गए हैं (आधिकारिक स्रोत से संकलित):

  1. बेरमो प्रखंड
  • आर्मो
  • बैधकारो ईस्ट
  • बैधकारो वेस्ट
  • बेरमो ईस्ट
  • बेरमो साउथ
  • बेरमो वेस्ट
  • बोडिया नॉर्थ
  • बोडिया साउथ
  • गोविंदपुर A, B, C, D, E, F
  • जरांगदीह नॉर्थ, जरांगदीह साउथ
  • जरीडीह ईस्ट, जरीडीह वेस्ट
  • कुरपानिया
  • लुकुबाद
  1. चंदनक्यारी प्रखंड
  • आदरकुड़ी
  • कालिकापुर
  • बटबिनोर
  • अमैना
  • (अन्य पंचायतों की पूरी सूची आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है)
  1. चास प्रखंड
  • चास नगर पंचायत क्षेत्र के बाहर ग्रामीण पंचायतें आती हैं।
  • यहाँ कई पंचायतें हैं जैसे: बालीडीह, करमा, करगली, आदि।
  1. गोमिया प्रखंड
  • गोमिया क्षेत्र में पंचायतें जैसे: तेनुघाट, डुमरी, पिंडरकोम, आदि।
  1. जरीडीह प्रखंड
  • जरीडीह ईस्ट
  • जरीडीह वेस्ट
  • अन्य पंचायतें जैसे: पिंडरकोम, बालीडीह, आदि।
  1. कसमार प्रखंड
  • कसमार
  • खैराचातर
  • मंजूरा
  • अन्य पंचायतें
  1. पेटरवार प्रखंड
  • पेटरवार
  • तांतरी पिछरी
  • अन्य पंचायतें
  1. चन्द्रपुरा प्रखंड
  • चन्द्रपुरा
  • टुंडी
  • अन्य पंचायतें
  1. नावाडीह प्रखंड
  • नावाडीह
  • डुमरी
  • अन्य पंचायतें

यहाँ का वाहन निबंधन कोड JH-09 है।

बोकारो जिले का  जनसंख्या

2011 की जनगणना के अनुसार बोकारो जिले की कुल जनसंख्या 20,62,330 है।

  • अनुसूचित जाति: 2,99,227
  • अनुसूचित जनजाति: 2,55,626
  • साक्षर जनसंख्या: 12,73,520
  • कुल श्रमिक: 6,85,368
    • मुख्य श्रमिक: 3,80,304
    • सीमांत श्रमिक: 3,05,064
  • अश्रमिक: 13,76,962

यह आँकड़े बताते हैं कि बोकारो जिले में श्रमिक वर्ग की संख्या काफी अधिक है, जो यहाँ के औद्योगिक स्वरूप को दर्शाती है।

नदियाँ

बोकारो जिले की प्रमुख नदी दामोदर है। यह नदी गोमिया प्रखंड से होकर प्रवेश करती है और पश्चिम बंगाल एवं झारखण्ड की सीमा बनाती है।

  • कोनार नदी: उत्तर-पश्चिम से आकर बेरमो के पास दामोदर में मिलती है।
  • खांजो नदी: कसमार क्षेत्र से आती है और तांतरी पिछरी के पास दामोदर में मिल जाती है।

इन नदियों ने जिले की कृषि, उद्योग और प्राकृतिक सौंदर्य को समृद्ध किया है।

बोकारो जिले का खनिज संपदा

बोकारो जिले में कोयला प्रमुख खनिज है।

  • पश्चिमी बोकारो कोयला क्षेत्र
  • पूर्वी बोकारो कोयला क्षेत्र

इनका विभाजन 1838 में ड्रमोंड द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर हुआ। यहाँ 19 कोयले की परतें हैं जिनकी मोटाई 4 फीट से अधिक है। यही कारण है कि बोकारो कोयला उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है।

उद्योग

बोकारो जिला औद्योगिक दृष्टि से झारखण्ड का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

  • प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र: बोकारो, बेरमो, कटहरा, करगली, चास, कतरास
  • उत्पादन: कच्चा लोहा, छड़ें, प्लेटें, चादरें, कोयला
  • गोमिया: बारूद उत्पादन का प्रमुख केंद्र

बोकारो स्टील प्लांट यहाँ का सबसे बड़ा उद्योग है जिसने जिले को “स्टील सिटी” की पहचान दी है।

बोकारो जिले का पर्यटन स्थल

बोकारो जिले में कई आकर्षक पर्यटन स्थल हैं:

  • सिटी पार्क: फूलों की विविधता के लिए प्रसिद्ध।
  • नेहरू पार्क: जैविक उद्यान जैसा स्वरूप।
  • पुरी मंदिर: धार्मिक आकर्षण का केंद्र।
  • मृगीखोह: जैनामोड़ मार्ग पर स्थित प्राकृतिक स्थल।
  • दुर्गापुर पहाड़: अपनी ऊँचाई और प्राकृतिक सुंदरता के कारण दर्शनीय।
  • तेनुघाट डैम: बेरमो और गोमिया क्षेत्र में स्थित।
  • सिंहपुर शिव मंदिर और बगदा का मार्गचंडी स्थल धार्मिक महत्व रखते हैं।
  • हिसीम और कदला पहाड़ी क्षेत्र भविष्य में पर्यटन विकास के लिए उपयुक्त हैं।

बोकारो जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल

 सिटी पार्क

बोकारो स्टील सिटी के मध्य स्थित सिटी पार्क हरियाली और फूलों की विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कृत्रिम झील और नौकायन की सुविधा उपलब्ध है। यह पार्क परिवारों और बच्चों के लिए पिकनिक स्थल के रूप में आदर्श है।

 नेहरू पार्क

नेहरू पार्क को जैविक उद्यान जैसा स्वरूप दिया गया है। यहाँ विभिन्न प्रकार के पौधे और वृक्ष लगाए गए हैं। पार्क के सामने स्थित पुरी मंदिर इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है।

 पुरी मंदिर

पुरी मंदिर बोकारो का प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसका स्थापत्य पुरी के जगन्नाथ मंदिर से प्रेरित है। यहाँ हर वर्ष रथयात्रा का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

 मृगीखोह

जैनामोड़ मार्ग पर मंजूरा गाँव के पास स्थित मृगीखोह प्राकृतिक गुफाओं और सुंदर दृश्यों के लिए जाना जाता है। यह स्थल अभी विकास की प्रतीक्षा में है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह विशेष महत्व रखता है।

 दुर्गापुर पहाड़

कसमार प्रखंड में स्थित दुर्गापुर पहाड़ अपनी ऊँचाई और प्राकृतिक सुंदरता के कारण दर्शनीय है। यहाँ से आसपास के गाँव और प्राकृतिक दृश्य स्पष्ट दिखाई देते हैं।

 तेनुघाट डैम

दामोदर नदी पर बना तेनुघाट डैम बेरमो और गोमिया क्षेत्र में स्थित है। यह झारखण्ड का एक प्रमुख जलाशय है। यहाँ से बिजली उत्पादन भी होता है। डैम के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और पिकनिक के लिए उपयुक्त है।

 सिंहपुर शिव मंदिर

सिंहपुर का शिव मंदिर धार्मिक महत्व का स्थल है। शिवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहाँ विशेष आयोजन होता है।

 बगदा का मार्गचंडी स्थल

यह स्थल देवी मार्गचंडी के मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ यह सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

 हिसीम और कदला पहाड़ी क्षेत्र

ये क्षेत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं, लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य और पहाड़ी दृश्य इन्हें भविष्य में आकर्षक पर्यटन स्थल बना सकते हैं। यहाँ ट्रैकिंग और एडवेंचर गतिविधियों की संभावना है।

अन्य उल्लेखनीय स्थल

  • गर्गा डैम: चास प्रखंड में स्थित यह जलाशय प्राकृतिक सुंदरता और जलक्रीड़ा के लिए प्रसिद्ध है।
  • बानासो मंदिर: धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र।
  • सेवाती वैली: प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर घाटी।

बोकारो जिले का सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन

बोकारो जिले का सामाजिक जीवन विविधतापूर्ण है। यहाँ विभिन्न जाति, धर्म और समुदाय के लोग रहते हैं। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आकर बसे हैं। इस कारण बोकारो में सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलती है। यहाँ के त्योहारों में छठ, होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस आदि बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं।

शिक्षा

बोकारो जिला शिक्षा के क्षेत्र में भी अग्रणी है। यहाँ कई विद्यालय और महाविद्यालय हैं। बोकारो स्टील सिटी में डी.ए.वी., चिन्मय विद्यालय, दिल्ली पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं। उच्च शिक्षा के लिए बोकारो कॉलेज और अन्य तकनीकी संस्थान उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष

बोकारो जिला झारखण्ड का औद्योगिक हृदय है। यहाँ की इस्पात फैक्ट्री, कोयला खदानें, नदियाँ, पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक विविधता इसे विशिष्ट बनाती हैं। बोकारो न केवल झारखण्ड बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है।

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