Abraham Lincoln

Abraham lincoln |अब्राहम लिंकन अमेरिका के पहले रिपब्लिकन राष्ट्रपति

अब्राहम लिंकन (Abraham lincoln)  ने “जनता का, जनता के लिए, और जनता द्वारा शासन” (Government of the people, by the people, for the people) जैसी परिभाषा देकर लोकतंत्र को एक नई पहचान दी। यह विचार आज दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों की आत्मा बन चुका है।जब पूरी दुनिया अंधकार में थी—भेदभाव, दासता और अन्याय के साए में  था ,तब अब्राहम लिंकन( Abraham lincoln) सामने आया जिसने अपने विचारों की रोशनी से लाखों दिलों को जगाया। वह कोई राजा नहीं था, न ही धनाढ्य कुल में जन्मा था, लेकिन उसके विचार सम्राटों से भी अधिक प्रभावशाली थे। खेतों में काम करने वाला वह साधारण बालक एक दिन अमेरिका का राष्ट्रपति बना और सत्य, समानता और लोकतंत्र का अमिट संदेश छोड़ गया। उसका नाम था अब्राहम लिंकन (Abraham lincoln)

अब्राहम लिंकन  का जन्म |Abraham Lincoln’s birth

अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी, 1809 को अमेरिका के केंटकी राज्य में एक गरीब किसान परिवार में हुआ। बचपन में उन्होंने अपने पिता के साथ खेतों में कठिन मेहनत की। स्कूल की दहलीज़ पर वे मुश्किल से एक साल ही जा सके, लेकिन पढ़ने की भूख ने उन्हें खुद से पढ़ना और लिखना सिखा दिया। एक दिन कुछ बड़ा करने की आग उनके भीतर जल चुकी थी।

अब्राहम लिंकनका संघर्ष |Abraham Lincoln conflict

जीवन के आरंभिक दिनों में लिंकन ने नाविक, दुकानदार और डाकघर के कर्मचारी जैसे कई काम किए। हर काम में उन्होंने ईमानदारी और मेहनत का परिचय दिया। समय के साथ उन्होंने वकालत सीखी और जनता से जुड़ने लगे। अपनी सादगी और सच्चाई से वे लोगों के दिलों में जगह बनाने लगे।

अब्राहम लिंकन का राजनीति में पहला कदम

इलिनॉय राज्य की विधानसभा से राजनीति में उनका प्रवेश हुआ। वहाँ से वे अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव तक पहुँचे। दो बार सीनेट के चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी सच्ची लगन और जनहित की भावना ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका नहीं।

अब्राहम लिंकन  का  गुलामी के खिलाफ जंग

उस समय अमेरिका दो भागों में बँट रहा था—दक्षिणी राज्य, जहाँ दास प्रथा थी, और उत्तरी राज्य, जो इसका विरोध कर रहे थे। लिंकन इस अमानवीय प्रथा के सख़्त खिलाफ थे। वे मानते थे कि सभी इंसान बराबर हैं और किसी को गुलाम बनाना अन्याय है।

अब्राहम लिंकन  का  राष्ट्रपति बनना—एक ऐतिहासिक मोड़

1860 में लिंकन अमेरिका के पहले रिपब्लिकन राष्ट्रपति बने। लेकिन दक्षिणी राज्य उनके विचारों से असहमत थे। उन्होंने अमेरिका से अलग होकर नया राष्ट्र ‘कन्फेडरेट’ बनाने का ऐलान कर दिया, जिससे 12 अप्रैल 1861 को गृह युद्ध छिड़ गया। लिंकन देश की एकता के लिए हर संभव प्रयास करने लगे।

अब्राहम लिंकन का  राष्ट्र की एकता के लिए निर्णायक संघर्ष

चार साल चले इस भयंकर युद्ध में लाखों लोग मारे गए। पर लिंकन अपने निर्णय पर अडिग रहे। उन्होंने न केवल विद्रोह को कुचला, बल्कि देश की अखंडता को बनाए रखा। उनका नेतृत्व कठिन समय में देश के लिए आशा की किरण बन गया।

अब्राहम लिंकन  ने  दास प्रथा का अंत किया| Abraham Lincoln ended slavery

1 जनवरी 1863 को लिंकन ने ‘दास मुक्ति उद्घोषणा’ जारी की। इससे लाखों दासों को स्वतंत्रता की आशा मिली। यह घोषणा आगे चलकर संविधान के 13वें संशोधन का आधार बनी और अमेरिका में दास प्रथा पूरी तरह समाप्त हो गई।

अब्राहम लिंकन  कागेट्सबर्ग का अमर भाषण | Abraham Lincoln Kagetsburg’s immortal speech

19 नवंबर 1863 को लिंकन ने गेट्सबर्ग में जो भाषण दिया, वह केवल कुछ ही मिनटों का था, लेकिन उसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। यह भाषण लोकतंत्र, समानता और बलिदान की सच्ची भावना को समर्पित था। इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे महान भाषणों में माना जाता है।

अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र को एक नई पहचान दी |Abraham Lincoln gave democracy a new identity.

अब्राहम लिंकन (Abraham lincoln)  ने “जनता का, जनता के लिए, और जनता द्वारा शासन” (Government of the people, by the people, for the people) जैसी परिभाषा देकर लोकतंत्र को एक नई पहचान दी। यह विचार आज दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों की आत्मा बन चुका है।जब पूरी दुनिया अंधकार में थी—भेदभाव, दासता और अन्याय के साए में  था ,तब अब्राहम लिंकन( Abraham lincoln) सामने आया जिसने अपने विचारों की रोशनी से लाखों दिलों को जगाया।

अब्राहम लिंकन  का निधन |Abraham Lincoln dies

लेकिन दुर्भाग्यवश, 14 अप्रैल 1865 को फोर्ड थिएटर में नाटक के दौरान, जॉन विल्किस बूथ (John Wilkis Booth) नामक व्यक्ति ने लिंकन को गोली मार दी। अगले दिन, 15 अप्रैल को उनका निधन हो गया। पूरी दुनिया ने एक महान नेता को खो दिया।

 प्रेरणा बनकर जीवित रहें अब्राहम लिंकन 

अब्राहम लिंकन केवल एक राष्ट्रपति नहीं थे, वे सत्य, संघर्ष, समानता और सेवा के प्रतीक थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सीमित साधनों से भी अनंत ऊँचाइयों तक पहुँचा जा सकता है। वे आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं—हर उस व्यक्ति के लिए जो असंभव को संभव बनाना चाहता है।

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