संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) से जुड़ी संस्था : मुख्यालय और संचालन | Particularly Vulnerable Tribal Groups – PVTG in hindi

Particularly Vulnerable Tribal Groups – PVTG : भारत विविधता का देश है, जहाँ अनेक जनजातीय समुदाय अपनी विशिष्ट संस्कृति, परम्परा और जीवनशैली के साथ बसे हुए हैं। इन समुदायों में कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें अत्यंत पिछड़े और संवेदनशील माना गया है। इन्हें संवेदनशील जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Groups – PVTG) कहा जाता है। इन समूहों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति अत्यंत कमजोर है, जिसके कारण इनके संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाएँ बनाई गई हैं। इन योजनाओं का संचालन भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) द्वारा किया जाता है।

 मुख्यालय

  • PVTG से संबंधित सभी योजनाओं और नीतियों का संचालन भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय करता है।
  • इस मंत्रालय का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • यहाँ से नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं, बजट आवंटित किया जाता है और राज्यों को दिशा-निर्देश प्रदान किए जाते हैं।

 संचालन व्यवस्था

1. केंद्रीय स्तर पर संचालन

  • PVTG समुदायों के विकास और संरक्षण की जिम्मेदारी सीधे जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन है।
  • मंत्रालय शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और आजीविका से संबंधित योजनाओं को तैयार करता है।
  • हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने PVTG विकास योजना के तहत अलग बजट और कार्यक्रम बनाए हैं ताकि इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

2. राज्य स्तर पर संचालन

  • प्रत्येक राज्य में जनजातीय कल्याण विभाग इन योजनाओं को लागू करता है।
  • राज्य सरकारें स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं में संशोधन करती हैं।
  • उदाहरण के लिए, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में PVTG समुदायों की बड़ी संख्या निवास करती है, इसलिए यहाँ विशेष कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

झारखण्ड में PVTG योजनाओं से जुड़ी संस्थाएँ

 जनजातीय कल्याण विभाग, झारखण्ड सरकार

झारखण्ड में PVTG समुदायों के उत्थान का केंद्रीय स्तंभ है जनजातीय कल्याण विभाग

  • यह विभाग केंद्र सरकार से प्राप्त दिशा‑निर्देशों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करता है।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और आजीविका से जुड़ी योजनाओं का बजट और क्रियान्वयन इसी विभाग के अधीन होता है।
  • विभाग का उद्देश्य है कि राज्य के सबसे पिछड़े और संवेदनशील समुदायों तक विकास की रोशनी पहुँचे।

Tribal Research and Training Institute (TRTI), रांची

1953 में स्थापित यह संस्थान आज डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान के नाम से जाना जाता है।

  • TRTI जनजातीय जीवन, संस्कृति, कला और सामाजिक‑आर्थिक समस्याओं पर शोध करता है।
  • यह सरकार को नीतिगत सुझाव देता है और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करता है।संस्थान में Tribal Museum, Library और Training Centre हैं, जहाँ जनजातीय धरोहर का संरक्षण और प्रदर्शन किया जाता है।
  • TRTI का कार्य केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाने योग्य भी बनाता है।

 Integrated Tribal Development Agencies (ITDA)

ITDA झारखण्ड सरकार की वह संस्था है जो योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का कार्य करती है।

प्रत्येक ITDA का नेतृत्व Project Director करता है।

  • यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को सीधे समुदाय तक पहुँचाती है।
  • ITDA स्वयं सहायता समूह (SHG) और सामुदायिक संगठनों को बढ़ावा देती है, ताकि महिलाएँ और ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।
  • ITDA का कार्यक्षेत्र ज़िला स्तर पर होता है और यह सुनिश्चित करती है कि योजनाओं का लाभ किसी भी गाँव या समुदाय तक पहुँचने से न छूटे।

 District Tribal Development Offices (DTDO)

प्रत्येक जिले में District Welfare Officer या Tribal Development Officer होता है।

ये कार्यालय ITDA और राज्य सरकार की योजनाओं को लागू करते हैं।

  • छात्रवृत्ति, आवास योजना, चिकित्सा सहायता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन इन्हीं कार्यालयों के माध्यम से होता है।
  • वन अधिकार कानून (Forest Rights Act) के तहत वन पट्टा वितरण और सामुदायिक भवनों का निर्माण भी DTDO की जिम्मेदारी है।
  • इन कार्यालयों का उद्देश्य है कि PVTG समुदायों को सीधे लाभ पहुँचाया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर किया जा सके।

3. अनुसंधान और संस्थागत सहयोग

  • Tribal Research Institutes (TRI) : ये संस्थान जनजातीय जीवन, संस्कृति और समस्याओं पर शोध करते हैं और सरकार को सुझाव देते हैं।
  • Integrated Tribal Development Agencies (ITDA) : ये एजेंसियाँ योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करती हैं।
  • इनके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, पोषण कार्यक्रम और आजीविका योजनाएँ सीधे समुदाय तक पहुँचती हैं।

 प्रमुख योजनाएँ और कार्यक्रम

1. शिक्षा

  • PVTG बच्चों के लिए विशेष आवासीय विद्यालय खोले गए हैं।
  • छात्रवृत्ति योजनाएँ चलाई जाती हैं ताकि आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा बाधित न हो।
  • मातृभाषा में शिक्षा देने पर भी जोर दिया जाता है।

2. स्वास्थ्य और पोषण

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाती हैं।
  • पोषण योजनाओं के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष आहार दिया जाता है।
  • टीकाकरण और स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जाता है।

3. आवास और आजीविका

  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत PVTG परिवारों को घर उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • आजीविका के लिए कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प और लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जाता है।
  • स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जाता है।

 चुनौतियाँ

  • भौगोलिक अलगाव : अधिकांश PVTG समुदाय दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं।
  • अशिक्षा और अज्ञानता : शिक्षा का स्तर अत्यंत निम्न है।
  • स्वास्थ्य समस्याएँ : कुपोषण और संक्रामक रोगों का प्रकोप अधिक है।
  • आर्थिक पिछड़ापन : आजीविका के साधन सीमित हैं और आधुनिक तकनीक तक पहुँच नहीं है।
  • सांस्कृतिक संरक्षण : विकास के साथ-साथ उनकी परम्पराओं और संस्कृति को सुरक्षित रखना भी चुनौती है।

 सरकार के प्रयास

  • केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर विशेष योजनाएँ चला रही हैं।
  • PVTG विकास योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और आजीविका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • TRI और ITDA जैसी संस्थाएँ शोध और क्रियान्वयन में सहयोग कर रही हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) का भी सहयोग लिया जा रहा है।

 निष्कर्ष

संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) भारत की सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनका जीवन प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। लेकिन सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के कारण ये समूह आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर इनके उत्थान के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और आजीविका पर केंद्रित योजनाएँ इनके जीवन स्तर को सुधारने में सहायक हो रही हैं।

इन प्रयासों का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, परम्परा और पहचान को सुरक्षित रखते हुए उन्हें सम्मानजनक जीवन देना है। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाए तो आने वाले वर्षों में PVTG समुदाय भी भारत की विकास यात्रा में बराबरी से सहभागी बन सकेंगे।

                                                                                                                                    आलेख -डॉ आनंद किशोर दांगी 

                  आलेख -डॉ आनंद किशोर दांगी 

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