Tariff | टैरिफ क्या है? | आयात-निर्यात पर शुल्क की विस्तृत जानकारी | अमेरिका का नया बिल और 500% टैरिफ (Tariff) का खतरा

आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में टैरिफ (Tariff) एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक उपकरण है। यह केवल कर वसूली का साधन नहीं बल्कि देशों की व्यापार नीति, घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारक है। जब कोई देश आयातित वस्तुओं पर शुल्क लगाता है, तो उसका सीधा असर उपभोक्ताओं, उद्योगों और व्यापारिक साझेदारों पर पड़ता है। टैरिफ एक बहुआयामी आर्थिक उपकरण है। यह घरेलू उद्योगों को सुरक्षा देता है, सरकार को आय प्रदान करता है और व्यापार संतुलन बनाए रखता है। लेकिन अत्यधिक टैरिफ (Tariff) से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में तनाव पैदा होता है। जैसे हाल के दिनों में अमेरिका ने हाल ही में एक नया प्रस्तावित कानून (Sanctioning Russia Act 2025) को आगे बढ़ाया है, जिसके तहत भारत जैसे देशों पर 500% तक का टैरिफ (Tariff) लगाने की धमकी दी गई है। यह कदम उन देशों को दंडित करने के लिए है जो रूस से सस्ता तेल खरीदते हैं। अगर लागू हुआ तो भारत के अमेरिकी निर्यात पर भारी असर पड़ेगा। इस लेख में टैरिफ (Tariff) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है –

Tariff | टैरिफ की परिभाषा

  • जब कोई देश दूसरे देश से वस्तुएँ या सेवाएँ आयात करता है, तो उन पर लगाया गया कर टैरिफ कहलाता है।

  • यह कर सरकार द्वारा तय किया जाता है और व्यापारिक नीति का हिस्सा होता है।

  • टैरिफ का सामान्य अर्थ है – आयात या निर्यात पर लगाया गया शुल्क।

टैरिफ (Tariff) लगाने के उद्देश्य

  • घरेलू उद्योगों की रक्षा करना – विदेशी वस्तुओं को महँगा करके स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना।

  • राजस्व जुटाना – सरकार के लिए आय का स्रोत।

  • ट्रेड बैलेंस बनाए रखना – आयात-निर्यात का संतुलन बनाए रखना।

  • विदेशी प्रतिस्पर्धा को सीमित करना – घरेलू बाजार में विदेशी कंपनियों का दबाव कम करना।

  • अत्यधिक आयात पर नियंत्रण – ज़रूरत से ज़्यादा आयात को रोकना

प्रकारविवरण
Import Tariff (आयात शुल्क)विदेश से आने वाले सामान पर लगाया जाने वाला कर।
Export Tariff (निर्यात शुल्क)देश से बाहर जाने वाले सामान पर लगाया जाने वाला कर।
Transit Tariff (पारगमन शुल्क)किसी देश से होकर गुजरने वाले सामान पर लगाया जाने वाला कर।
Protective Tariffघरेलू उद्योगों को बचाने के लिए लगाया गया शुल्क।
Revenue Tariffसरकार के राजस्व बढ़ाने के लिए लगाया गया शुल्क।

टैरिफ (Tariff) का असर

  • कीमतों पर प्रभाव: आयातित वस्तुएँ महँगी हो जाती हैं।

  • उपभोक्ताओं पर असर: महँगी वस्तुओं के कारण लोग घरेलू विकल्प चुनते हैं।

  • उद्योगों पर असर: घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।

  • अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर असर: कभी-कभी टैरिफ से व्यापारिक विवाद और Trade War शुरू हो जाते हैं।

उदाहरण

  • अगर भारत अमेरिका से मोबाइल फोन आयात करता है और अमेरिका उस पर 50% टैरिफ लगा देता है, तो वह मोबाइल भारत में महँगा बिकेगा।

  • इसी तरह, अगर भारत अपने किसानों की रक्षा करना चाहता है तो वह विदेश से आने वाले गेहूँ पर टैरिफ लगा सकता है।

टैरिफ (Tariff) और वैश्विक अर्थव्यवस्था

आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में टैरिफ का महत्व और भी बढ़ गया है।

  • WTO (World Trade Organization) देशों को टैरिफ कम करने और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।

  • लेकिन कई देश अपनी घरेलू नीतियों के अनुसार टैरिफ लगाते हैं।

  • अमेरिका और चीन के बीच Trade War इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

टैरिफ (Tariff) के फायदे और नुकसान

फायदे

  • घरेलू उद्योगों को सुरक्षा।

  • सरकार को राजस्व।

  • व्यापार संतुलन बनाए रखना।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना।

टैरिफ (Tariff) के नुकसान

  • उपभोक्ताओं पर बोझ।

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में तनाव।

  • नवाचार और प्रतिस्पर्धा में कमी।

  • कभी-कभी भ्रष्टाचार और तस्करी को बढ़ावा।

अमेरिका का नया बिल और 500% टैरिफ (Tariff) का खतरा

1. बिल की मंजूरी

  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य रूस से तेल और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाना है।

  • यह कदम यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए उठाया गया है।

  • बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे गाहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है।

2. भारत, चीन और ब्राज़ील पर असर

  • इस बिल से राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों पर दबाव बनाने की शक्ति मिलेगी।

  • अमेरिका चाहता है कि ये देश रूस से तेल खरीदना बंद करें, क्योंकि इससे रूस को युद्ध जारी रखने के लिए पैसा मिलता है।

  • अगर ये देश रूस से तेल खरीदना जारी रखते हैं तो अमेरिका उनके सामान पर बहुत ऊँचा टैरिफ (500% तक) लगा सकता है।

3. भारत पर पहले से लगे टैक्स

  • पिछले साल अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 25% टैक्स लगाया था।

  • इसके अलावा रूस से तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त टैक्स भी लगाया गया।

  • इस तरह कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैक्स 50% तक पहुँच गया, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई।

4. अमेरिका और चीन के बीच तनाव

  • अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 145% तक टैक्स लगाया।

  • इसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर 125% टैक्स लगा दिया।

  • इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया और एक तरह का Trade War शुरू हो गया।

5. अस्थायी समझौता

  • बाद में अमेरिका और चीन ने एक संयुक्त बयान जारी किया कि वे 90 दिनों तक अपने-अपने टैरिफ रोक देंगे और बातचीत जारी रखेंगे।

  • समझौते के अनुसार:

    • अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर टैक्स 145% से घटाकर 30% कर दिया।

    • चीन ने अमेरिका से आने वाले सामान पर टैक्स 125% से घटा दिया

6. संभावित असर

  • अगर 500% टैरिफ लागू होता है तो भारत और चीन के अमेरिकी बाजार में निर्यात पर भारी असर पड़ेगा।

  • भारतीय सामान अमेरिका में बहुत महँगा हो जाएगा, जिससे उसकी प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी।

  • इससे भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में और तनाव आ सकता है।

  • चीन के साथ पहले से ही व्यापारिक विवाद चल रहा है, ऐसे में यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।

निष्कर्ष

यह बिल अमेरिका की जियोपॉलिटिकल रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य रूस की आय को कम करना और उसे युद्ध जारी रखने से रोकना है। लेकिन इसका सीधा असर भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों पर पड़ेगा। अगर 500% टैरिफ लागू हुआ तो यह वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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