SUPPERMOON

सुपरमून | वुल्फ सुपरमून 2026 | Supermoon 2026 |चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा से बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई

सुपरमून 2026 ( Supermoon) :  वर्ष 2026 का आगाज़ एक अद्भुत प्राकृतिक दृश्य से होगा। नए साल की शुरुआत में ही आकाश में ऐसा नज़ारा दिखाई देगा, जो न केवल खगोल विज्ञान के प्रेमियों को रोमांचित करेगा बल्कि आम जनमानस को भी आकर्षित करेगा। 2 जनवरी की रात से 3 जनवरी की सुबह तक चंद्रमा अपनी पूर्णिमा अवस्था में पृथ्वी के सबसे निकट होगा। इस कारण यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में अधिक बड़ा और चमकीला दिखाई देगा। इस घटना को “वुल्फ सुपरमून” कहा जाता है। यह नाम प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है, जहाँ जनवरी की पहली पूर्णिमा को भेड़ियों की सक्रियता और उनकी आवाज़ों से जोड़ा जाता था। वैज्ञानिक दृष्टि से यह घटना चंद्रमा की अंडाकार कक्षा और पृथ्वी से उसकी दूरी के कारण होती है। जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नज़दीकी बिंदु (Perigee) पर होता है, तो उसका आकार और चमक सामान्य से अधिक दिखाई देती है।

भारत सहित पूरी दुनिया में वर्ष 2026 की शुरुआत एक अद्भुत खगोलीय घटना से होगी। 2 जनवरी 2026 की रात से 3 जनवरी की सुबह तक आकाश में “वुल्फ सुपरमून” दिखाई देगा। यह सामान्य पूर्णिमा से बड़ा और अधिक चमकीला होगा।

सुपरमून ( Supermoon) क्यों होता है? वैज्ञानिक कारण

 चंद्रमा की कक्षा गोल नहीं, अंडाकार होती है

  • चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक अंडाकार पथ पर घूमता है। इस कारण वह कभी पृथ्वी से दूर होता है और कभी पास आता है।
    पृथ्वी के निकटतम बिंदु को ‘पेरिजी’ कहते हैं
  • जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे पास होता है, उसे ‘पेरिजी’ (Perigee) कहा जाता है। यदि इसी समय पूर्णिमा हो, तो चंद्रमा का आकार बड़ा और चमक अधिक दिखाई देती है।
  • पूर्णिमा + पेरिजी = सुपरमून
    जब पूर्ण चंद्रमा पेरिजी पर होता है, तो यह सुपरमून कहलाता है। यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 14% बड़ा और 30% अधिक चमकीला होता है।

2026 का सुपरमून ( Supermoon) क्यों खास है?

• यह वर्ष 2026 की पहली पूर्णिमा है।
• इसे “वुल्फ सुपरमून” कहा जाता है, जो जनवरी की पूर्णिमा का पारंपरिक नाम है।
• इस रात चंद्रमा के साथ-साथ अन्य खगोलीय घटनाएँ भी देखी जा सकती हैं, जैसे उल्का वर्षा और ग्रहों की स्थिति।

 

सुपरमून ( Supermoon) कब और कहाँ दिखाई देगा

  • तारीख: 2–3 जनवरी 2026
  • भारत में समय: शाम लगभग 5:45 बजे चंद्र उदय के साथ सबसे बड़ा और चमकीला दृश्य
  • दृश्यता: पूरे भारत में साफ आसमान होने पर आसानी से देखा जा सकेगा

 सुपरमून क्यों होता है?

  • चंद्रमा की कक्षा अंडाकार (Elliptical) होती है।
  • जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नज़दीकी बिंदु Perigee पर होता है, तो वह सामान्य से बड़ा और चमकीला दिखता है।
  • इस स्थिति में:
    • आकार लगभग 14% बड़ा
    • चमक लगभग 30% अधिक

 “वुल्फ मून” नाम का कारण

  • जनवरी की पहली पूर्णिमा को परंपरागत रूप से “Wolf Moon” कहा जाता है।
  • यह नाम यूरोप और अमेरिका की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है, जब सर्दियों में भेड़िए चाँदनी रात में अधिक सक्रिय दिखाई देते थे।

सुपरमून ( Supermoon)भारत में देखने का अनुभव

  • सबसे अच्छा समय: चंद्र उदय के तुरंत बाद (शाम 5:45–6:00 बजे IST)
  • अतिरिक्त दृश्य:
    • उसी रात जुपिटर और सैटर्न भी आकाश में दिखाई देंगे।
    • साथ ही क्वाड्रैन्टिड उल्का वर्षा (Quadrantid Meteor Shower) भी देखने को मिल सकती है।

 सामान्य पूर्णिमा बनाम सुपरमून

विशेषतासामान्य पूर्णिमासुपरमून (जनवरी 2026)
आकार (दिखाई देने वाला)सामान्य~14% बड़ा
चमकसामान्य~30% अधिक चमकीला
नामपूर्णिमावुल्फ सुपरमून
अगला अवसरहर माहनवंबर 2026

सुपरमून ( Supermoon) देखने और फोटोग्राफी के सुझाव

  • नंगी आँखों से देखना सबसे अच्छा है।
  • फोटोग्राफी के लिए:
    • ट्राइपॉड का उपयोग करें
    • वाइड-एंगल और टेलीफोटो लेंस से बेहतर परिणाम
    • स्मार्टफोन में “नाइट मोड” या “लॉन्ग एक्सपोज़र” सेटिंग का प्रयोग करें

 ध्यान देने योग्य बातें

  • बादल या धुंध होने पर दृश्यता प्रभावित हो सकती है।
  • आँखों की सुरक्षा के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है।
  • यह घटना पूरी तरह प्राकृतिक है और स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालती।

 जनवरी 2026 का यह वुल्फ सुपरमून सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि साल की शुरुआत का शानदार प्राकृतिक उपहार है।

   

                                                                                                                                          आलेख : डॉ  . आनंद  किशोर दांगी 

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