लोहरदगा जिला ( Lohardaga District ) छोटानागपुर की गोद में बसा वह जिला है, जिसकी धरती पर प्रकृति ने अपनी अनुपम छटा बिखेरी है। चारों ओर फैले छोटे-छोटे पहाड़, घने जंगल और हरियाली की आभा इस भूमि की आत्मा बनकर इसे जीवंत करती है। पश्चिम से पूर्व की ओर ढलती हुई इसकी धरती मानो स्वयं प्रकृति की लय में बह रही हो। इतिहास भी यहाँ के भूगोल जितना ही आकर्षक है। 1972 में इसे अनुमंडल का दर्जा मिला और 1983 में राँची के विभाजन के बाद गुमला और लोहरदगा स्वतंत्र जिलों के रूप में अस्तित्व में आए। इस जिले का नाम इसके प्रमुख नगर पर पड़ा, जो आज भी प्रशासनिक केंद्र है। जैन परंपरा में वर्णित है कि भगवान महावीर ने इस भूमि की यात्रा की थी। जिस स्थान पर वे ठहरे थे, उसे मुंडारी भाषा में “लोर-ए-यादगा” कहा जाता है, जिसका अर्थ है “आँसुओं की नदी”। यह नाम करुणा और आध्यात्मिकता का प्रतीक है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक गहराई को उजागर करता है। इतिहास के पन्नों में लोहरदगा का उल्लेख सम्राट अकबर के समय लिखी गई आइने अकबरी में भी मिलता है। नाम की व्युत्पत्ति ‘लोहार’ अर्थात लोहे का व्यापारी और ‘दगा’ अर्थात केंद्र से हुई है। इस प्रकार लोहरदगा का अर्थ हुआ “लोह खनिज का केंद्र”। यह नाम न केवल इसकी प्राकृतिक संपदा को दर्शाता है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक महत्व को भी उजागर करता है।
भौगोलिक स्थिति एवं प्रशासनिक संरचना
- क्षेत्रफल: 1491 वर्ग किलोमीटर
- अनुमंडल: केवल एक – लोहरदगा
- प्रखंड: कुल 7 – लोहरदगा, कुड्डू, भंडरा, सेन्हा, किस्को, कैरो और पेसरार
- गाँव: 354 (353 आबाद, 1 उजड़ा हुआ)
- पंचायत: 51
- परिवारों की संख्या: 65,915
भूगर्भिक संरचना
- यह क्षेत्र मुख्यतः आर्कियन ग्रेनाइट (Archean Granite) और गनीस से निर्मित है।
- ऊपरी भाग में ग्रेनाइट और गनीस के बीच लेटेराइट मिट्टी पाई जाती है, जो प्लिस्टोसीन युग में बनी थी।
- नदी घाटियों में आधुनिक काल का अलूवियम पाया जाता है।
- प्रमुख खनिज: बॉक्साइट (जिले की पहचान इसी से है)।
- अन्य खनिज: फेल्सपार, फायरक्ले, चायना क्ले – जिनका आर्थिक महत्व अपेक्षाकृत कम है।
- मिट्टी के प्रकार:
- ग्रेनाइट एलुवियम
- लाल मिट्टी
- बलुई मिट्टी
- लाल-बजरी मिश्रित मिट्टी
- लेटेराइट, लाल एवं पीली मिट्टी
जलवायु
- सालभर स्वास्थ्यवर्धक एवं आरामदायक मौसम।
- वार्षिक औसत तापमान: 23°C
- वार्षिक औसत वर्षा: 1000–1200 मिमी
- वर्षा का सामान्य प्रवाह: पश्चिम से पूर्व की ओर।
लोहरदगा का इतिहास
- 1983 ई. में राँची जिले को विभाजित कर तीन नए जिले – राँची, गुमला और लोहरदगा – बनाए गए। इसी क्रम में लोहरदगा स्वतंत्र जिला के रूप में अस्तित्व में आया।
- जिले का नामकरण इसके प्रमुख नगर लोहरदगा पर हुआ, जो आज भी प्रशासनिक मुख्यालय है।
- 1972 ई. में इसे अनुमंडल का दर्जा मिला और 1983 ई. में जिला का रूप प्राप्त हुआ।
- जैन परंपरा के अनुसार भगवान महावीर ने इस क्षेत्र की यात्रा की थी। जिस स्थान पर वे ठहरे थे, उसे स्थानीय मुंडारी भाषा में “लोर-ए-यादगा” कहा जाता है, जिसका अर्थ है “आँसुओं की नदी” (River of Tears)।
- सम्राट अकबर के समय लिखी गई प्रसिद्ध पुस्तक “आइने अकबरी” में भी लोहरदगा का उल्लेख मिलता है।
- नाम की व्युत्पत्ति: ‘लोहार’ का अर्थ है लोहे का व्यापारी और ‘दगा’ का अर्थ है केंद्र। इस प्रकार लोहरदगा का अर्थ हुआ “लोह खनिज का केंद्र”।
- लोहरदगा को 1983 में राँची से अलग कर स्वतंत्र जिला बनाया गया।
- ब्रिटिश शासनकाल में यह छोटानागपुर का हिस्सा था।
- 1780: रामगढ़ हिल ट्रैक का भाग रहा।
- 1833: विलकिंसन ने शेरघाटी को जिला मुख्यालय बनाया।
- 1843: मुख्यालय लोहरदगा स्थानांतरित हुआ।
- 1899: राँची जिला मुख्यालय बना और लोहरदगा अनुमंडल में परिवर्तित हो गया।
- 1983: पुनः जिला का दर्जा प्राप्त हुआ।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
- कुल जनसंख्या: 4,61,790
- श्रमिक: 2,21,332
- मुख्य श्रमिक: 1,03,001
- सीमान्त श्रमिक: 1,18,331
- अश्रमिक: 2,40,458
- अनुसूचित जाति: 15,330
- अनुसूचित जनजाति: 2,62,734
- साक्षर: 2,59,707
नदियाँ एवं प्राकृतिक जलस्रोत
- प्रमुख नदियाँ: कोयल, शंख, नंदिनी, चौपाट, फुलझर
- सभी नदियाँ वर्षा आधारित हैं और गर्मियों में प्रायः सूख जाती हैं।
- पहाड़ी पथों पर कई सुंदर झरने भी देखने को मिलते हैं।
दक्षिणी कोयल नदी – लोहरदगा से लगभग 8 किमी उत्तर-पूर्व में प्रवाहित होकर यहाँ दक्षिण की ओर मुड़ती है।
खनिज संपदा
- प्रमुख खनिज: बॉक्साइट, क्ले, ओचर, केओलीन
- अनुमानित बॉक्साइट भंडार: 70 लाख टन
- बॉक्साइट के विशाल भंडार के कारण यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
लोहरदगा जिला ( Lohardaga District ) का खनिज संपदा
- बड़े उद्योग: महुआ पाट, बगडू एवं लोहरदगा क्षेत्र में बॉक्साइट खनन
- लघु उद्योग:
- बीड़ी निर्माण (बीड़ी पत्ता से)
- चमड़े से जूते निर्माण
- होटल व्यवसाय
- कोई प्रमुख भारी उद्योग नहीं है।
लोहरदगा पर्यटन स्थल
- सम्पूर्ण पाट क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर
- प्रसिद्ध जलप्रपात: धरधरिया और निंदी
लोहरदगा तक पहुँचने के मार्ग
हवाई मार्ग
लोहरदगा में कोई सार्वजनिक हवाई अड्डा नहीं है। यहाँ आने के लिए निकटतम हवाई अड्डे हैं –
- बिरसा मुंडा हवाई अड्डा, राँची – लगभग 75 किलोमीटर दूर
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता – लगभग 487 किलोमीटर दूर
- लोकनायक जयप्रकाश हवाई अड्डा, पटना – लगभग 300 किलोमीटर दूर
रेल मार्ग
लोहरदगा रेल नेटवर्क द्वारा राँची स्टेशन के माध्यम से लगभग सभी राज्यों से जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त, यह लातेहार जिले के टोरी स्टेशन से भी जुड़ा है।
सड़क मार्ग
लोहरदगा से होकर कई राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं –
- राष्ट्रीय राजमार्ग 43
- राष्ट्रीय राजमार्ग 39
- राष्ट्रीय राजमार्ग 143A
इन मार्गों से जिले तक पहुँचना आसान है। साथ ही, निजी बस सेवाएँ भी उपलब्ध हैं, जिनसे अंतर-शहरी यात्रा की जा सकती है।
वाहन निबंधन संख्या –JH-08