भारत के राष्ट्रगान जन – गण – मन | Rastgan jan gan man

राष्ट्रगान (Rastgan) : रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित जनगणना को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया है । रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा यह गीत पंच पदों में रचित है  किंतु भारत सरकार ने सिर्फ प्रथम पद के 13  पंक्तियों को ही राष्ट्रगान के रूप में मान्यता दी है । यह गीत रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित गीतांजलि से लिया गया है ।जो इस प्रकार है

जन – गण – मन अधिनायक जय हे 

भारत भाग्य विधाता

पंजाब – सिंधु – गुजरात – मराठा

द्राविड़ – उत्कल बंग

विंध्य – हिमाचल – यमुना – गंगा

उच्छल – जलधि तरंग

तव शुभ नामे जागे

गाहे तव जय- गाथा

जन – गण मंगल दायक जय हे

भारत भाग्य विधाता

जय हे, जय हे,

जय हे जय जय जय जय है।

  • रविंद्र नाथ टैगोर ने इस जीत की रचना सितंबर 1911 में की थी
  • इस गीत को पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गया गया था
  • कांग्रेस अधिवेशन में रविंद्र नाथ टैगोर की भतीजी सरला देवी चौधरी ने कुछ स्कूली बच्चों के साथ राष्ट्रीय गान को गया था
  • 1912 ईस्वी में तत्वबोधी नामक पत्रिका में भारत भाग्य विधाता के शीर्षक से प्रथम बार प्रकाशित हुई थी
  • रविंद्र नाथ टैगोर ने 1919 ईस्वी में इस गीत को अंग्रेजी रूपांतरण तब मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया शीर्षक के रूप में किया था
  • भारत सरकार ने 24 जनवरी 1950 ई को इसे भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया
  • राष्ट्रगान (Rastgan) गाने का समय 52 सेकंड है
  • किंतु कुछ अवसरों पर इसे संक्षिप्त रूप में भी गया जाता है जिसमें प्रथम और अंतिम पंक्तियां ही गई जाती है ।
  • संक्षिप्त में गाने का समय 20 सेकंड है
  • राष्ट्रगान (Rastgan) गाते समय व्यक्ति को सावधान की मुद्रा में एकाग्रचित रहना चाहिए ।

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