एगो गाँवे एगो बुढी रह- हली । ओकर बेटा – पुतोहु तो नाइ रहथिन खाली एगो सोना लखें नाती रहइ । नातीक उमइर एहे . छोउ – सात बछर हतइ । ऊ बुढ़ी रोइज बोन से पतइ – दोइतन , झुरी – काठी आर बोन से कंद – मुल आनतली आर ओकरे से गुजर – बसर कर – हली ।
बूढी के बोने बाघ भेटेक
एक दिन ऊ बोन गेली आर खूब झुरी – काठी जमा कइर कोनो तरि बाँइध तो देली मुदा अलगावेहे नाँइ पारी । घरी घरी कोरसिस करली मुदा हाइर गेली । ऊ डाक दइकें कहली- आवा रे जीव – जन्तु तनी मदद करा भाइ ! कठिया अलगाइ दा रे । बुढीक डाक सुइन एगो बाघ आइ धमकल आर कहलइ- ‘ ए बुढ़ी , हामें तोरा कठिया अलगाइ देबउ तो हमरा की देबें ? ” बुढ़ी हाँथ जोइर कहली- ए बाघ भाइ , हाम गरीब दुखी हों , से की दिये पारबउ ? बाघ फिन कहलइ- ” अच्छा तोर घार कोन कोन हथुन ? ” बुढ़ी बताओही जे हामर बेटा – बेटी कोइ नाइ हे , खाली एकेगो नाती हे । तखन बाघ कहलइ- अच्छा ठिक नतीया देबे तो अलगाइ देबउ । बुढ़ी बाघ के फरमाइस सुइन सकपकाइ गेली आर कहली- नाइ बाघ हामार एकेगो सोना लखें नाती हे तोरों द देबउ तो हामें की करब ? बाघ फिन कहलइ- नाँइ , तोरा नतिया दिये भेतउ आर नाँइ देवें तो तोरे खइबउ । हमरौँ बड़ी जोर भुख लागल है । बुढी तो फेरा में फांइस गेली । ने हां कहे पारी ने ना । ऊ सोचली एखन हा कही देहिअइ फिन मटियाइ देबइ । दरसन देबे नाइ करबई । कुछ दिन बाघ भुलाइ जाइत ताब बोन आवब । एहे सोइच ऊ बाघ के हा कही देली । बाघ काठी आलगाइ देलइ आर कहलइ- हामें कइसे बिसवास करियउ की तोंय नाती देवें ? बुढी कहलइ- बिसवास तो करेहे भेतउ बाघ । जखन सब सुइत जिता , हामें आपन नातीक तेल – उल लगाइके खाटी सुताइ देबइ आर हूवे दीया लइके हम्हू रहबउ तोय आइ बुढी घार चइल गेली आर खाइ- पी चुपचाप घर भित गेली । बाघ आइल , आस पर देखल जब भिंसोरिया हाव लागल ता गोसाइकें बोन घुइर जाहे।
हफता दू हफता बाद बुढी सोचली जे आब बाघ भुलाइ गेल हतक । ऊ फिन बोन गेली । बाघ ताक लगाइ लगाइ हल । ऊ कूदले बुढी जगुन आइ धमकल आर कहलई- बाह बुढी , तोय तो हमरी बस धोखा देलें । आब हामें तोरों नाँइ छोडबउ आइझ तो तौरा खड्ने करबर । बुढ़ी हाथ – गोड़ पकडे लागली आर कहे लागली हाम तारा धोखा नाँइ देतलियस बाघ , थकल हारल हलों से कखने निंदाइ गेला हाम्हूँ नाँइ जानों । तोंय आइज अइहों बाघ । हामें आपन नातीक तेल लगाइ सुताइ देले रहबउ । बाघ माइन गेल । कहलइ- ठिक हउ अवरी धाव छोइड दे हियउ , अबरी धोखा देले तो जहीं पइबउ हुवें खाइ जिब । एतना कही बाघ फइर काठी अलगाइ दे हे आर बुढीक छोइड द हेइ ।
बाघ बूढी के नातिक उठाइ बोन दने भागेक
बुढी घार अइली आर खुब सोचे लागली – की करों ? नाँइ देवइ तो हामरे खइतक , कोई उपाय नाँइ सुझे । ताब ऊ नातीक तेल – उल माखाइ के खटीयें सुताइ देलइ आर वादाक मुताबिक दिया लइके हूँवें बइस गेली । बाघ आइल आर चेंगाक खाटीये संग उठाइ बोन दने भागल । भागते – भागते खुब गाजार बोन घुइस गेल । आब एगो बोर गाछेक जइर भूइ से सटइत रहे , बाघ बोर गाछेक निचु दइ गुजरल जा हले कि चंगा जइर के पकइड़ के टंगाइ गेल । बाघ के पतो नाइ चले ऊ छुछ खाटी लेले चइल चाहे । चेंगा विहान से सांइझ ओहे बोर गाछे बिताइ देहे । सुरुज डूबे लागल लागल तो वोन – भइसा आवे लागला आहे बोर गाछेक तर जटिन आखनिक वास रहे । भँइस के देइख चेंगा आर सपइट गेल । मॅइस बइठला आर पागुर मारे लागला तो सुनाई पडलइ ककरो सिसकेक आवाज । ऊ साब मूंड उठाइ उपर ताके हथ तो देखो हा मानुस के चेगा कांदे लागल हे । ऊ साब चेंगाक हेठे उतरे कहो ह मुदा चेंगा डर उतरे नाँइ । ऊ साब फिन कहला- हे उत्तर बाबु , काहे डेरा हैं ? हामिन कोनो नाँइ करबर । हामनिक पिठिया बड़ी आसे खाली ओतने करिहे , जखन हामिन दह – तह में बइतव लखन गिठिया रगइद दिहे आर भुख लागतर तो पतइ के दोना बानाइ हामिनेक द दुही के पी लिहे ।चेंगाक आब बिसवास भई गेलइ कि भंइस सब कोना नोई करता । ऊ हेठें नॉभल आर भइस के दूध पी – पी के औखनिक साथ दूध रहे लागल ।
नाती के रजा के बेटी से बिहा
समझ बितते गेल . चेंगाक रोवा – पाँइख झारे लागलइ । मैंइस के दूध पी – पी चेंगा लाल भइ गेलइ । देही भिसिंड लोहा तरी सकत भड़ गेलइ । चुइल सोना लखें चमके लागलइ गते – गते ऊ जुवान भइ गेल । एक दिन ऊ नदीं नहा हल से ओकर एगो चुइल टुइट गेलइ । आब ऊ चुइल के पतइ के बिरी में राइख बोहाइ देल । बिरी बोहते – बोहते नदीक दोसर धाइर चइल गेलइ जहाँ एगो राजाक बेटी नहा हली । ऊ बिरी के देख के हाथें धरलइ आर खोलो ही । बिरी खुलल तो राजाक बेटी चुइल के देइख मोहित भइ जाही । चुइल सोना लखे खुद चमकइ । एते सुंदर चुइल केकर हइ भाइ ? एते सुंदर चुइल हे तो लड़का कते सुंदर हवत ? ऊ केस लइके आपन बाप जगुन गेली आर केस देखाइ के कहली- ” बाप ई केस जकर हतइ हामें ओकरे से बिहा करबड़ । ” राजा केस देख के मोहित भइ जाहे । ओकरो बेटीक बियाह के चिंता रह और ऊ कतना जगह आपन ठाकुर के लड़का तबसे भेजबो करल हल । ऊ गोट राइज में ढिंढोरा पिटवाइ देल कि ई केस कोन लड़का के हे ओकरा खाइज के निकाला । हामें ऊ लड़का संग आपन बटीक बियाह दवई आर आधा राइजो दई देवउ राजाक आदमी चाइरो बट पराइर गेला । कुछ गांव – गांव , कुछ बाने झार खाजत – खाजत राजाक आदमी सई बोर गाछ तर पोहचला जहाँ के लड़का रह हलई आव लड़का के ऊ सब देख ले हथ फिन के सब बात बताई दे हथिन लड़का कहलई देखा भाई हमरा महंस सब पासले हथ जदी के सब इजाजत देता तो हामे बिहा कर लखड से सब से हमरा राय लिये दा तबे हागे कोनो कहबउन राजाक आदमी इसके राय सुने खतिर हुँने बइठ जा हथ । सांइझ बेरा भंइस औ सत्यो ह तो सब बात सुनाई देल जाहे । अंइस सब राय – सलाह कह और कह हथ , हौं , हाँ लड़काक जोड़ी लगाना जरूरी हे , बेजोडा थोडे रहत ‘ से जउ बिहा कर । लड़का के राजदरबार में लानल जाहे फिन राजा ओकर नाम ऐकान पुगे है । ऊ सब कुछ बताइ देहे । फिन राजा आपन बेटी संग ओकर बियाह कर देलइ आर घोड़ा – हाँथी में बारात के सजाइ के ढोल – ढाक के साथ आपन बेटी आर दामाद के बिदाइ करलइन । बारात पहुँचले लड़काक गाँव तो ओकर बुढ़ी आजी बिमार खाटीं सुतल हली । लड़का आर ओकर जखनी हाँथी से उतर – हथ आर दुइयो बुढ़ीक गोड लागला । बुढ़ी खाटी से गते – गते उठली आर उइठ के बइस गेली फिन कहो ही- तोंय के लागा राजा ? आर हामें गरीब बुढ़ीक काहे गोड लागा – हा ? हामर जगुन कुछ नाँइ हे बाबा । लड़का आपन आजी के अकवाइर के पकड़ हइ आर कांइद – कांइद कह – हे- हामें तोर नाती लागीयो आजी । तोर नाती ! जेकरा बाघ लइकें भागल हलउ । आर ई हामर जनी लागी । बुढ़ी आपन नाती आर नातिन पुतोउ दुइयों के अँकवाइर ले ही । फिन तीनो हाँसी – खुसी रहे लागा – हथ ।